Madhya Pradesh: Jan Chetna Yatra July 17- 20 by Chutkha Parmanu Sangharsh Samiti

July 22, 2014

चुटका परमाणु संघर्ष समिति, समर्थन समूह
बादशाह हलवाई मन्दिर के सामने,
पोली पाथर, नर्मदा रोड, जबलपुर मध्य प्रदेश

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स्थानीय ग्रामीण, आदिवासी समाज के विरोध के बावजूद क्यों थोपी जा रही विनाषकारी चुटका परियोजना ?

जबलपुर, 18 जुलाई, 2014 : भारी पुलिस एवं सषस्त्रबल के मध्य दमनकारी जनसुनवाई का नाटक और अब प्रषासन एवं एनपीसीआईएल द्वारा धूर्ततापूर्ण कार्यवाही कर चुटका परमाणु विद्युत परियोजना को अमली जामा पहनाने की कोषिषे की जा रही है। पांचवी अनुसूची व पेसा कानून वाले क्षेत्र में तमाम अनियमितताओं, स्थानीय विरोध एवं ग्रामसभाओं द्वारा इस परियोजना के खिलाफ प्रस्ताव पारित होने के बावजूद सरकार ग्रामीण एवं आदिवासी समाज पर यह विनाषकारी परियोजना जबरदस्ती थोपने की कोषिष कर रही है और इसके लिए नित-नये हथकण्डे अपना रही है। किन्तु हम अपनी जान दे देंगे लेकिन इस परमाणु परियोजना को अपने क्षेत्र में स्थापित नहीं होने देंगे।

उक्ताषय के विचार चुटका परमाणु विद्युत परियोजना के विरोध में आयोजित जन-चेतना यात्रा की शुरूवात करते हुए चुटका परमाणु संघर्ष समिति के नवरतन दुबे ने कहा कि भारत को लोकतांत्रिक, समाजवादी, गणतंत्र कहना बेमानी है। जहां आम ग्रामीण एवं आदिवासी समाज की आवाज दबा दी जाती है। कहने को तो हमारा देष लोकतांत्रिक है लेकिन समाज के वंचित, शोषित, ग्रामीण और आदिवासी समाज के हक और अधिकारों के लिए कोई स्थान नहीं है। सषस्त्र पुलिस बल और बन्दूक की नोक पर शांतिपूर्ण, अहिंसापूवर्क आन्दोलन करने वाले ग्रामीण, आदिवासी समाज की आवाज को दबा दिया जाता है उन्हें अपनी बात कहने का मौका ही नहीं मिलता और अब शासन एवं एनपीसीआईएल धूर्ततापूर्ण कार्यवाही कर ग्रामसभा द्वारा चुटका परियोजना के खिलाफ पारित प्रस्ताव को तोडने का प्रयास कर रही है।

संघर्ष समिति के श्री दादुलाल कुड़ापे ने कहा कि परियोजना की डी.पी.आर. अभी तक नहीं बनी है। इसके बावजूद भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही चलायी जा रही है, जो कि असंवैधानिक है। पुनर्वास नीति में यह प्रावधान है कि प्रभावित होने वाले व्यक्ति को परियोजना निर्माण के पूर्व पुनर्वास स्थल बताया जायेगा। उनकी सन्तुष्टी व सहमति के पश्चात ही परियोजना कार्य को आगे बढ़ाया जायेगा। परन्तु प्रभावितों को अभी तक परियोजना प्रबंधन द्वारा पुनर्वास स्थल नहीं बताया गया है। इसके बावजूद भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही को आगे बढ़ाना अन्यायपूर्ण है।

संघर्ष समिति के श्री मनमोहन सिंह ने कहा कि परियोजना से प्रभावित होने वाले मण्डला जिले के सभी गांव संविधान की पांचवीं अनुसूची के अन्तर्गत हैं। पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम-1996 (पेसा कानून) में विस्थापन के पूर्व ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य है। चुटका, कुण्डा और टाटीघाट की ग्रामसभाओं ने सर्वसम्मति से इस परियोजना का विरोध कर लिखित आपत्ति लगाई है अतः यह संवैधानिक प्रावधानों और पेसा कानून का उल्लंघन है।
जन-चेतना यात्रा को मोले सिंह गुठरिया, धनराज बरकड़े, पुरन सिंह मरावी, मंगल सिंह सोयाम आदि ने भी संबोधित किया। यात्रा में लगभग चुटका, टांटीघाट, मानेगांव सहित आसपास के गांवों के लगभग 100 महिलाए एवं पुरूष सम्मिलित हुए।

शासन एवं एनपीसीआईएल की घूर्ततापूर्ण कार्यवाही
शासन एवं एनपीसीआईएल द्वारा धूर्ततापूर्ण कार्यवाही कर चुटका, टाॅटीघाट एवं कुण्डा ग्रामसभा द्वारा चुटका परियोजना के खिलाफ पारित ग्रामसभा-प्रस्तावों को तोडने का प्रयास किया जा रहा है।

चुटका परमाणु संघर्ष समिति के नवरतन दुबे ने ने कहा कि शासन एवं एनपीसीआईएल के दलालों के माध्यम से टांटीघाट में 200 घरों की नई बस्ती बनाई जा रही है और जोर-षोर से काम चल रहा हैै। इस तरह 200 परिवारों को बसा कर सरकार ‘‘भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनव्र्यवस्थापन कानून के तहत सार्वजनिक एवं निजी भागीदारी के लिए भूमि अधिग्रहण करने से पहले 80 प्रतिषत भू-धारकों की सहमती की अनिवार्य शर्त को पूरा करने के जुगाड में लगी है।

अब तक लगभग 150 परिवारों के लिए टांटीघाट में दलालों द्वारा चुटका परियोजना के समर्थकों के लिए झुग्गी एवं पक्के निवास का कार्य आरंभ किया जा चुका है। और संभावना है कि निकट भविष्य में परियोजना से संबंधित अन्य पंचायत क्षेत्रों में भी दलालों को बसाने की कार्यवाही की जायेगी। जिससे ग्रामसभा द्वारा पूर्व में पारित प्रस्ताव को तोडा जा सके।

श्री नवरतन दुबे, मोले सिंह गुठरिया, धनराज बरकड़े, पुरन सिंह मरावी, मंगल सिंह सोयाम, मनमोहन सिंह सहित स्थानीय ग्रामीण आदिवासियों ने शासन एवं एनपीसीआईएल की इस धूर्ततापूर्ण कार्यवाही के खिलाफ असंतोष व्यक्त किया है।

अनिल कर्णे
9425384555