उत्तराखण्ड: ऐरा श्रमिकों पर बर्बर लाठी चार्ज, नेतृत्वकारी मजदूरों व इ.म.के अध्यक्ष की गिरफ्तारी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

July 24, 2014

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उत्तराखण्ड पुलिस द्वारा ऐरा श्रमिक संगठन के मजदूरों पर बर्बर  लाठी चार्ज एवं इ.म.के अध्यक्ष कैलाश भट्ट व 18 अन्य मजदूरों को फर्जी मुकदमे लगाकर जेल भेजने की कार्रवाई का विभिन्न ट्रेड यूनियनों, श्रमिक व जनपक्षधर संगठनों ने विरोध किया है।

24 जुलाई को उत्तराखण्ड के रूद्रपुर में इंकलाबी मजदूर केन्द्र, सिडकुल ठेका मजदूर कल्याण समिति के प्रतिनिधियों व एक्टू के जिला सचिव के के. के. बोरा ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन दिया जिसमें ऐरा बिल्डसिस के मजदूरों पर बर्बर लाठी चार्ज की निंदा की गई तथा इसके लिए दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गयी। इसके अलावा इ.म.के अध्यक्ष कैलाश भट्ट की गैर कानूनी तरीके से की गई गिरफ्तारी व इ.म.के अध्यक्ष सहित 18 अन्य मजदूरों के खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज करने की कार्रवाई की निन्दा करते हुए इसके लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों को दंडित करने की मांग रखी।

24 जुलाई को उत्तराखण्ड के लाल कुंआ (नैनीताल) में एक जुलूस निकालकर उत्तराखण्ड पुलिस की कार्रवाई का विरोध करते हुए पुलिस प्रशासन का पुतला फूंका गया। उत्तराखण्ड के ही रामनगर में उक्त घटना की निंदा करते हुए नायब तहसीलदार के माध्यम से एक ज्ञापन मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड को प्रेषित किया गया। ज्ञापन प्रेषित करने वालों में इंकलाबी मजदूर केन्द्र, उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी, वन निगम स्केलर संगठन, कर्मचारी शिक्षक संगठन, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र व क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के कार्यकर्ता शामिल थे।

सभा में वक्ताओं ने सिडकुल प्रशासन व पुलिस प्रशासन द्वारा मजदूरों के श्रम अधिकारों को कुचलने की नीति की भर्त्स्ना  की तथा इंकलाबी मजदूर केन्द्र के अध्यक्ष कैलाश भट्ट सहित सभी मजदूरों पर दर्ज फर्जी केस वापस लेने व उनकी तत्काल रिहाई की मांग की तथा मजदूरों के दमन के दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।

उत्तराखण्ड के काशीपुर में इंकलाबी मजदूर केन्द्र व परिवर्तनकामी छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने परगनाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया गया जिसमें उत्तराखण्ड पुलिस की इस कार्रवाई की भत्र्सना करते हुए गिरफ्तार मजदूरों व इ.म.के अध्यक्ष की रिहाई की मांग की गयी।
हरियाणा के फरीदाबाद औद्योगिक क्षेत्र में 24 जुलाई को ही इंकलाबी मजदूर केन्द्र के कार्यकर्ताओं ने आयुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड को एक ज्ञापन प्रेषित किया जिसमें ऐरा श्रमिक संगठन के मजदूरों तथा इ.म.के अध्यक्ष की गैर कानूनी तरीके से गिरफ्तारी की निन्दा करते हुए इसके लिए दोषी पुलिस अधिकारियों को इंडित करने की मांग की गयी।

राजधानी दिल्ली में 25 जुलाई को इंकलाबी मजदूर केन्द्र, मजदूर एकता केन्द्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र, प्रतिध्वनि, आॅल वीनस वर्कर्स यूनियन के प्रतिनिधियों व कार्यकर्ताओं ने उत्तराखण्ड भवन पर जोरदार प्रदर्शन किया गया। विभिन्न संगठनों व ट्रेड यूनियनों के कार्यकर्ता एक जुलूस की शक्ल में उत्तराखण्ड पुलिस व पूंजीपतियों के गठजोड़ के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उत्तराखण्ड भवन पहुंचे। उन्होंने हाथों में प्ले कार्ड लिये थे जिनमें उत्तरखण्ड पुलिस व पूंजीपतियों का  गठजोड़ मुर्दाबाद, पूंजीवाद साम्राज्यवाद मुर्दाबाद, मजदूरों के जनवादी अधिकारों का हनन बंद करो आदि नारे लिखे हुए थे। उत्तराखण्ड भवन पर एक जोरदार सभा की गयी जिसमें विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा इस घटना की भर्त्स्ना करते हुए सभी मजदूरों व इंकलाबी मजदूर केन्द्र के अध्यक्ष कैलाश भट्ट पर लगाये गये फर्जी मुकदमे वापस लेते हुए गिरफ्तार मजदूरों की अविलम्ब रिहाई की मांग के साथ लाठी चार्ज व दमन के दोषी पुलिस कर्मियों व सिडकुल प्रशासन की निंदा की गयी। इससे पूर्व पुलिस द्वारा उत्तराखण्ड भवन से पहले ही प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की गई लेकिन प्रदर्शनकारियों के जोरदार प्रतिरोध के चलते उन्हें पीछे हटना पड़ा। उत्तराखण्ड भवन पर हुए प्रदर्शन के अंत में रेजीडेन्ट कमश्निर के माध्यम से उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन प्रेषित किया गया जिसमें  ऐरा श्रमिक संगठन के मजदूरों के जनवादी अधिकारों के दमन का विरोध व उत्तराखण्ड सरकार की पूंजीपरस्त नीतियों का विरोध करते हुए सभी मजदूरों व इ. म. के अध्यक्ष कैलाश भट्ट की तत्काल रिहाई तथा उन पर लगाये गये सभी फर्जी मुकदमे वापस लेने और मजदूरों पर बर्बर लाठी चार्ज व दमनात्मक कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारियों को दंडित करने की मांग की गई।

उत्तराखण्ड के हरिद्वार औद्योगिक क्षेत्र में 26 जुलाई को इंकलाबी मजदूर केन्द्र, भेल मजदूर ट्रेड यूनियन  एवं क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के प्रतिनधि मंडल ने स्थानीय उप जिलाधिकारी (A.D. M .) को ज्ञापन सौंपा जिसमें उत्तराखण्ड पुलिस की कार्रवाई की निन्दा करते हुए मजदूरों व इ.म.के अध्यक्ष पर लगे फर्जी मुकदमे हटाने एवं उनकी तत्काल रिहाई की मांग की गई।

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उत्तराखण्ड: यूनियन का झंडारोहण करने पर एरा मज़दूरों का भारी पुलिसिया दमन

रुद्रपुर (उत्तराखण्ड)। एकिकृत औद्योगिक आस्थान सिडकुल स्थित एरा बिल्डसस में नवगठित यूनियन ऐरा श्रमिक संगठन का झंडारोहण कार्यक्रम पुलिस दमन का शिकार हो गया। जिसमें दो दर्जन से ज्यादा मज़दूर घायल हो गये। यूनियन नेताओं सहित 18 मज़दूरों पर संगीन धाराएं लगाकर उन्हें जेल भेज दिया गया। यह घटना ठीक उस दिन की है, जब उत्तराखण्ड के कांग्रेसी मुख्यमंत्री हरीश रावत के विधायकी का मतदान हो रहा था।

दरअसल, 21 जुलाई को कम्पनी गेट पर यूनियन का झंडारोहण होना तय था। लेकिन 20 की रात एरा प्रबन्धन ने झंडे के लिए बने चबूतरे को तोड दिया। मज़दूर नेता इलाके की अन्य यूनियनों के साथ जब सिडकुल पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज कराने गये तो पुलिस ने कहा कि तुम्हारे यूनियन संविधान में झंडा लगाने का प्रावधान नहीं है। इस बीच प्रबन्धन ने सभी मज़दूरों की जनरल शिफ्ट लगा दी, ताकि दो बजे का कार्यक्रम प्रभावित हो। इससे यूनियन ने कार्यक्रम का समय बदल दिया।

सांय लगभग 5 बजे जब यूनियन नेता व मज़दूर झंडा लगाने गेट पर एकत्रित हुए, तो वहाँ पुलिस पहले से मौजूद थी। इस बीच सिडकुल (उत्तराखण्ड औद्योगिक विकास निगम) के अधिकारी मौके पर पहुँच गये और फरमान सुनाया कि यह सिडकुल का ‘ग्रीन बेल्ट’ है और यहाँ झंडा नहीं लग सकता। इसका अन्य यूनियनों ने विरोध किया। सिडकुल अधिकारी ने यहाँ तक धमकी दी कि सिडकुल के अन्य कारखानों में लगे झंडे को भी उखाड़ा जाएगा। इन सबके बावजूद मज़दूरों ने यूनियन का झंडा फहरा दिया।

फिर क्या था, अचानक पुलिस आला अधिकारियों के साथ और पुलिस फोर्स पहुँची और मज़दूरों पर लाठी चार्ज शुरू कर दिया। कई मज़दूरों के सिर तक फटे, तो कुछ गम्भीर रूप से घायल हुए। मामला यहीं नहीं रूका। 18 मज़दूरों को पुलिस अपनी गाडि़यों में भर कर उठा ले गयी और उन पर पुलिस और सिडकुल अधिकारियों पर हमला का उल्टा मामला बनाकर जेलों में ठूंस दिया।

इस घटना के विरोध में 22 जुलाई को जब विभिन्न यूनियनों का प्रतिनिधि मण्डल जिलाधिकारी से मिलने पहुँचा तो उन्होंने मिलने से इन्कार कर दिया। यहाँ तक कि गिरफ्तार मज़दूरों के परिवार वालों से भी नहीं मिले। बाद में यूनियन प्रतिनिधियों से जब कलेक्ट्रेट प्रभारी की मुलाकात हुई तो वे भी प्रबन्धन की ही भाषा बोलते रहे। यही नहीं, कलेक्ट्रेट पर सादी वर्दी में पहुँची पुलिस इंकलाबी मज़दूर केन्द्र के अध्यक्ष कैलास भट्ट को भी उठा ले गयी।

इस दमनकारी घटना के बाद इलाके के मज़दूरों में भारी रोष व्याप्त है। यह चर्चा भी गर्म है कि भाजपाई मुख्यमंत्री खण्डूरी या निशंक हों, चाहें कांग्रेसी एन डी तिवारी, बहुगुणा या हरीश रावत, मालिकों के इशारे पर मज़दूरों के दमन का ही सिलसिला बढ़ा रहे हैं। चाहें सन 2005 में इस्टर खटीमा के मज़दूरों के दमन का मामला रहा हो, चाहें सिडकुल पंतनगर में 2008 में भाष्कर मज़दूरों का दमन हो या फिर पिछले वर्ष टाटा-असाल का मज़दूर दमन, सभी एक ही सिलसिले को आगे बढ़ा रही हैं। यूनियन न बनने देना, जायज हकों के संघर्षों को कुचलना और अब यूनियन झंडे तक के लिए कहर बरपा करना आने वाले दिनों का अशुभ संकेत है।

देखना यह है कि क्या यह बढ़ता सिलसिला आने वाले दिनों में किसी बड़े प्रतिरोध को जन्म देगा?
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ऐरा बिल्डिसिस के मजदूरों पर मालिक व पुलिस प्रशासन के गठजोड़ का क्रूर हमला

मजदूरों पर पुलिस व पी. ए. सी. द्वारा लाठी चार्ज, एक दर्जन मजदूर गंभीर रूप से घायल, इ.म.के. के अध्यक्ष सहित 18 मजदूरों की 7 सी. एल. ए व अन्य धाराओं के तहत फर्जी मुकदमों में गिरफ्तारी

21 जुलाई, पंतनगर, उत्तराखण्ड, स्थानीय सिडकुल (स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलेपमेन्ट कार्पोरेशन आॅफ उत्तरांचल लि0) के अंतर्गत ऐरा बिल्डिसिस के श्रमिकों के द्वारा अपनी यूनियन पंजीकरण के बाद फैक्टरी गेट पर झंडा लगाने की कार्रवाई मालिक व प्रशासन के गठजोड़ को इस कदर नागवार गुजरी कि शाम 5 बजे पुलिस और पी. ए. सी का दल बल फैक्टरी गेट पर पहुंचा और उसने मजदूरों के द्वारा लगाये झंडे को उखाड़ फेंका। मजदूरों ने जब इसका प्रतिरोध करते हुए दुबारा झंडा लगाने का प्रयास किया तो पुलिस व पी. ए. सी ने बर्बर लाठी चार्ज किया जिसमें एक दर्जन मजदूरों को गंभीर चोटें पहुंची तथा कई हताहत हुए। पुलिस ने 18 मजदूरों का गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार मजदूरों में से एक का सिर फट गया है तथा एक का हाथ टूट गया है। बाकी अन्य घायल मजदूर विभिन्न अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं।

अगले दिन 22 जुलाई को इस पुलिसिया दमन का विरोध करते हुए इंकलाबी मजदूर केन्द्र के अध्यक्ष कैलाश भट्ट के नेतृत्व में एक ट्रेड यूनियन व मजदूरों का प्रतिनिधि मंडल जब जिलाधिकारी से मिलकर उन्हें ज्ञापन देने के लिए स्थानीय कलेक्ट्रेट पहुंचा तो जिलाधिकारी (DM) ने मिलने से मना कर दिया। सहायक जिलाधिकारी (ADM) व परगना अधिकारी (SDM) भी मिलने को तैयार नहीं हुए और सादी वर्दी में पुलिस कर्मियों ने पहले तो इ.म.के. के अध्यक्ष कैलाश भट्ट को पुलिस चैकी में एस. एच. ओ से वार्ता के लिये चलने को कहा। इस पर इ.म.के. के अध्यक्ष कैलाश भट्ट ने कहा कि “अगर बात करनी है तो यहीं कर लें और अगर गिरफ्तार करना है तो गिरफ्तार कीजिए।” इस बात पर पुलिस कर्मियों ने गिरफ्तारी की बात करते हुए धक्का मुक्की कर कैलाश भट्ट को जीप में बैठाया और स्थानीय चौकी ले गये। इसके बाद कैलाश भट्ट व 18 अन्य मजदूरों जिन्हें 21 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था, का मेडिकल कराकर उन्हें शाम 4 बजे कोर्ट में पेश किया गया। जज के कोर्ट में मौजूद न होने पर जज के घर जाकर इन लोगों पर फर्जी मुकदमें के कागजों पर दस्तखत करा लिये गये। इ.म.के. के अध्यक्ष कैलाश भट्ट व अन्य 18 मजदूरों पर 7 सी. एल. ए (क्रिमिनल लाॅ एमेन्डमेन्ड) सहित धारा 147, 341, 353, 332 व 447 के अंतर्गत फर्जी मुकदमे लगाये गये हैं। गैर जमानती धारा 7 सी. एल. ए के तहत निचली अदालत से जमानत नहीं हो सकती है। जिला अदालत ही जमानत दे सकती है।

गौरतलब है कि उत्तराखण्ड शासन-प्रशासन द्वारा मजदूर आंदोलन का दमन कोई नई बात नहीं है। इससे पूर्व इ.म.के. के अध्यक्ष कैलाश भट्ट पर दो साल पूर्व पुलिस प्रशासन द्वारा गैंगस्टर एक्ट लगाया जा चुका है। इंकलाबी मजदूर केन्द्र के नेतृत्व में चले हरिद्वार सिडकुल के राॅकमैन सत्याम आंदोलन में 350 मजदूरों की गिरफ्तारी हो या फिर इंकलाबी मजदूर केन्द्र के सम्मेलन के बाद हरिद्वार में 183 मजदूर कार्यकर्ताओं व ट्रेड यूनियन नेताओं पर 7 सी. एल. ए तथा भड़काऊ भाषण सहित कई धाराओं के अंतर्गत फर्जी मुकदमे लगाने का मामला हो, इंकलाबी मजदूर केन्द्र आंदोलन को आगे बढ़ाने के चलते शासन-प्रशासन के निशाने पर रहा है।

ऐरा बिल्डिसिस यूनियन गत एक वर्ष से अपनी यूनियन पंजीकरण के लिये संघर्षरत रही है। नवंबर 2013 से कम्पनी के 114 में 105 स्थायी मजदूरों ने इ. म. के. की सहायता से अपनी यूनियन पंजीकरण के प्रयास शुरु किये थे। इसकी भनक लगते ही कम्पनी प्रबंधन ने अध्यक्ष राजेन्द्र व महामंत्री हीरा लाल का स्थानान्तरण उत्तराखण्ड से बाहर करने की साजिश रची। श्रमिकों ने इसके खिलाफ मजबूती से संघर्ष किया। ढाई माह के संघर्ष के बाद कम्पनी को घुटने टेकने पड़े व उनको वापस काम पर बहाल करना पड़ा। यह सिडकुल के भीतर निकाले गये नेताओं की काम पर वापसी की पहली घटना थी, जिसका मजदूरों के बीच सकारात्मक असर पड़ा। कंपनी प्रबंधन ने यूनियन पंजीकरण रुकवाने के लिये छल-प्रपंच के सभी तरीके अपनाये। 105 में से 81 मजदूरों के फर्जी दस्तखत कर कंपनी प्रबंधकों द्वारा उप श्रमायुक्त के पास प्रार्थना पत्र भेजा गया कि मजदूर यूनियन पंजीकरण नहीं चाहते हैं कि मजदूर नेताओं द्वारा उनसे जबरन हस्ताक्षर कराये गये हैं। इसके खिलाफ यूनियन के 105 मजदूरों के हस्ताक्षर कराकर ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार (श्रम आयुक्त) के पास पत्र भेजा और तत्काल यूनियन पंजीकरण के लिये आग्रह किया। कंपनी प्रबंधन ने मजदूरों को पदोन्नति, वेतनवृद्धि तथा लालच देकर भी तोड़ने की कोशिशें की लेकिन वे नाकाम हो गयीं। अंततः मजदूर यूनियन पंजीकरण करवाने में सफल रहे। 15 जुलाई को गेट पर यूनियन का झंडा लगाने के लिये ऐरा श्रमिक संगठन ने जिलाधिकारी, उप श्रमायुक्त, एस. एस. पी आदि को पूर्व सूचना दे रखी थी। अंततः पुलिस प्रशासन ने षड़यंत्रपूर्वक मजदूरों के मनोबल को तोड़ने के लिये इस क्रूर दमनात्मक कार्रवाई को अंजाम दिया।
गौरतलब है कि इससे पूर्व लोकसभा चुनाव के अवसर पर इ.म.के. के अध्यक्ष कैलाश भट्ट जो कि लोकसभा चुनाव में एक मजदूर प्रत्याशी के बतौर खड़े थे, को सिडकुल में मजदूरों की सभा करने की प्रशासन ने अनुमति नहीं दी थी, कड़ा प्रतिरोध व आंदोलन की धमकी के बाद ही प्रशासन यह अनुमति देने के लिये मजबूर हुआ।

उत्तराखण्ड सरकार, प्रशासन व पूंजीपतियों का गठजोड़ मजदूरों के श्रम अधिकारों के प्रति चेतना को क्रूर दमन के द्वारा कुचलना चाहता है लेकिन लगातार उसकी दमनात्मक कार्रवाइयों के बावजूद मजदूरों का प्रतिरोध बढ़ता जा रहा है।

23 जुलाई को ऐरा श्रमिक संगठन के क्रूर दमन व उन पर लगाये गये फर्जी मुकदमों के खिलाफ सिडकुल के तमाम ट्रेड यूनियनों व श्रमिक संगठनों ने विरोध स्वरूप स्थानीय कलेक्ट्रेट पर एक दिवसीय धरने का कार्यक्रम आयोजित किया है।

सभी प्रगतिशील व जनवादी शक्तियों के द्वारा ऐरा बिल्डिसिस के मजदूरों के दमन के विरोध किये जाने की जरूरत है।