Statement by All India Workers Council in support of nationwide strike of Coal workers

November 26, 2014

24 नवम्बर, 2014 की कोयला श्रमिकों की राष्ट्रीय हड़ताल के समर्थन में..
कोल इण्डिया राष्ट्रीय सम्पत्ति है, इसे निजी मालिकाने में देना पूरे देश का हित है। कोल इण्डिया युवा पीढ़ी की स्थाई रोजगार का बड़ा जरिया है, इसे बंद करना देश का अहित है।
कोल इण्डिया द्वारा अर्जित लाभ देश की जनता का है, इसका विनिवेश करना देश का अहित है।
सरकार की इन देश विरोधी नीतियों के विरोध एवं राष्ट्रहित में एकजुट हो।

साथियों,

देश के सर्वोच्च न्यायालय ने 204 कोल ब्लाकों के आबंटन में हुये भयंकर लूट-पाट को देखते हुये, उसे रद्द करने का एवं जिन ब्लाकों में उत्पादन शुरू हो गया था, उन्हें कोल इंडिया को सुपुर्द करने का निर्णय दिया। मौजूदा सरकार ने इस फैसले की मूल भावना के खिलाफ जाकर इन 204 ब्लाकों के पुनः नीलामी करने की निर्णय लिया और, यही नहीं पिछली सरकार से एक कदम आगे जाकर इसके व्यापारिक (कामर्सियल) उपयोग की भी इजाजत देने का फैसला कर लिया है। इसके व्यापारिक उपयोग के लिये देश के कानून में भी संशोधन करने जा रहे हैं। इस तरह इस बड़ी राष्ट्रीय संपत्ति के निजीकरण की राह खोल दी है। खदानों, अर्थात कच्चे माल के स्रोतों पर निजी मालिकाना कायम करना देश की बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के एजेण्डे में प्राथमिकता पर है, बिना इसके वे अपने साम्राज्य का विस्तार नहीं कर सकते। मौजूदा सरकार ने उनके इस साम्राज्य विस्तार में श्रमिक हित एवं राष्ट्रहित की बलि चढ़ाकर मदद करने के लिये तय कर लिया है। और, आज हमें राष्ट्रहित में संघर्ष के लिये तय करना है।

24 नवम्बर, 2014 की कोल इण्डिया के श्रमिकों की एक दिवसीय हड़ताल मौजूदा सरकार पर जन विरोधी -देशविरोधी नीतियों को वापस लेने के लिये दबाव डालने का पहला कदम है। हमारा यह कदम पूरी मजबूती से पड़ना चाहिये, ताकि देश की जनता को लगे कि हम देश के भविष्य के लिये आगे आये हैं। देश में जब से आर्थिक नीतियां लागू हुयी हैं, तभी से राष्ट्रीय उद्यमों के विनिवेशीकरण की पक्रिया शुरू हुयी। इसका सीधा अर्थ था, कि इन उद्यमों के लाभ को निजी मालिकों की तिजोरी में पहुॅचाना। फिर निजी मालिकों का लाभ बढ़ाने के लिये श्रमिकों के अधिकारों में कटौती करते हुये चालीस प्रतिशत से अधिक श्रमिकों को ठेका मजदूर में बदल देना। देश के नौजवानों को बड़ी संख्या में रेाजगार देने की राह को बन्द करके स्थाई श्रमिकों की संख्या लगातार कम करते जाना। कोयला उत्पादन 1990 से कई गुना अधिक बढ़ा है, लेकिन आज स्थाई श्रमिकों की संख्या आठ लाख से घटकर 3.5 लाख ही रह गयी है। निजीकरण की प्रक्रिया शुरू होने पर इसमें और कमी आ जायेगी। इसे ही रोजगार विहीन विकास नीति कहते है।

यदि उत्पादन और रोजगार के पुराने अनुपात को बनाये रखा गया होता, तो यही कोल इंडिया 20 लाख से अधिक नौजवानों को स्थाई रोजगार देता। यही नहीं स्थाई रोजगार में लगे इन 20 लाख श्रमिकों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये कई लाख सहायक रोजगार भी पैदा होते। यह तो एक राष्ट्रीय उद्योग की बात है, यदि यही सारे उद्योगों पर लागू किया जाय, तो आज की तारीख में कई करोड़ स्थाई रोजगार पैदा होंगे, और देश का भविष्य निजी मुनाफाखोरों की तिजोरी में बंद होने की जगह देश के नोजवानों की जिन्दगी खुशियों से भर देगा।

इस हड़ताल में हमारी मांग यह भी है, कि उत्पादन करने वाले श्रमिकों को अपने उत्पाद का दाम तय करने और अपने उद्योग की नीतियों को निधा्ररित करने का अधिकार मिले। हमने अपने अनुभव से यह समझा है, कि अब सरकारों , प्रबन्धकों के भरोसे नीति निर्धारण का काम दोड़ने से सिर्फ निजी मालिकों का हित ही साधा जायेगा, न कि देश का, श्रमिकों का और न ही देश की आम जनता का। इन लोगों ने मिलकर देश की प्राकृतिक संपदा की लूट-पाट का जो नया खेल शुरू किया है, अब उसे पूरी तरह बन्द करवाना पड़ेगा। इसे बन्द किये बिना, इन नीतियों को पलटे बिना देश को बचाया नहीं जा सकता।

हमारे मांग है, कि ठेका श्रमिकों को भी स्थाई श्रमिकों के बराबर वेतन व अधिकार दिये जाये। समान काम का समान वेतन व अधिकार की नीति लागू की जाये। यदि काम की प्रकृति स्थाई है, तो उस पर ठेका श्रमिक रखना गैर कानूनी है। यह सरकारों को अब और गैर कानूनी काम करने से रोकने का दायित्व सबसे पहले श्रमिक वर्ग का है। कोल इण्डिया ही नहीं पूरे देश को ठेका मजदूरी की गुलामी से मुक्ति दिलाने का कार्यभार हमारे एजेण्डे पर है। इस कार्यभार को पूरा करने के लिये आगे बए़ने का अर्थ है, देशी-विदेशी दोनों प्रकार के निजी मालिकों के खिलाफ मोर्चा खोलना, लूट के नये वैश्विक तंत्र के खिलाफ मोर्चा खोलना। एक दिवसीय हड़ताल से आगे बढ़ते हुये एक राष्ट्रव्यापी राजनीतिक जनआंदोलन को मूर्त रूप देना। हमें इस जन आंदोलन की अगुवाई करनी है।

साथियों, खदानों की निजीकरण की प्रक्रिया के साथ भूमि अधिकरण कानून मे संशोधन का सवाल भी जुड़ा है। निजी मालिकों द्वारा भूमि अधिग्रहा को आसान बनाने के लिये सरकार इस कानून में भी आम जनता के हितों के खिलाफ संशोधन करने जा रही है, ताकि मनमाने तरीके से लोगों को उजाड़ कर खनिज सम्पदा का दोहन किया जा सकें। हमारी एक दिवसीय हड़ताल इन सभी सवालों के समाधान की राह खोलेगी। चीजें अब उस मंजिल पर पहुॅच गयी है, कि हमें देश की तकदीर को अपने हाथ में लेने का फैसला करना ही होगा। इसी में हमारी नयी पीढ़ी का भी सुरक्षित भविष्य है।

आज हमें अपने लिये अपने बच्चों के लिये, अपने देश के लिये संघर्ष का बिगुल बजाना है। आइये, हम सब मिलकर अपने साझा संघर्षो से देश का नया भविष्य बनायें।

सधन्यवाद,

आल इंडिया वर्कर्स कौन्सिल
ओ0पी0 सिन्हा, के0एन0 शुक्ला, बाल गोविन्द सिंह, नयनाधवण, दिलीप सिंह, राहुल, प्रकाश राउत, डी0एच0 माकड़े, चक्रपाल सिंह, राजेन्द्र सिंह, जयन्त गुप्ता नामा

Coal_Worker Strike