Call for action against the Nirbhaya incident in Rohtak

February 13, 2015

[This is a call for united, progressive, revolutionary action against the Nirbhaya incident in Rohtak and the growing incidence of anti-women crimes in Haryana issued by Naujawan Bharat Sabha, Disha Chhatra Sangathan, and Stree Mukti League – Ed]

रोहतक निर्भया काण्ड के खि़लाफ़ एकजुट हो!

हरियाणा में बढ़ते स्त्री-विरोधी अपराधों के खि़लाफ़ आवाज उठाओ!!


चुप्पी तोड़ो आगे आओ, लड़कर नया समाज बनाओ!

दोस्तो, मानवता को शर्मसार करने वाला एक और स्त्री विरोधी कुकृत्य हमारे सामने आया है। 1 फरवरी को लापता हुई नेपाली मूल की युवती का शव 4 फरवरी को रोहतक-हिसार रोड स्थित बहु अकबरपुर गाँव की ड्रेन के पास नोची हुई और नग्न अवस्था में पाया गया। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के मुताबिक युवती को, पाशविकता से सामूहिक बलात्कार करके बेरहमी से मार दिया गया। नेपाली मूल की पीड़िता युवती मानसिक रूप से अस्वस्थ थी और इलाज के लिए ही अपनी बहन के पास रोहतक आयी थी। पुलिस प्रशासन ने मामले को बिल्कुल भी गम्भीरता से नहीं लिया। हर बार की तरह प्रशासन शुरु में कान में रूई-तेल डालकर सोता रहा। रोहतक में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद ही 7-8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यहाँ पर बात प्रवासी और मूल निवासी की नहीं है क्योंकि इस तरह का जघन्य अपराध कोई पहला नहीं है। अभी पिछले दिनों ही पंजाब के लुधियाना में भी हमारी एक बहादुर बहन शहनाज को गुण्डा गिरोह ने बलात्कार के बाद आवाज़ उठाने पर ज़ि‍न्दा जला दिया था। दिल्ली के निर्भया काण्ड के समय पूरे देश में हुए जबरदस्त विरोध के बाद भी न जाने कितनी निर्भयाओं के साथ बलात्कार हुए, और न जाने कितनियों को मौत की नींद सुला दिया गया।

women

हरियाणा में पिछले दिनों ही बलात्कार की एक के बाद एक घटना हमारे सामने आयी थी। लगता है हरियाणा की जनता इन स्त्री विरोधी अपराधों को अपना भाग्य मान चुकी है यही कारण है कि ऐसे मामले हो जाने पर कुछ विरोध प्रदर्शन कर लिए जाते हैं, मोमबत्ती जुलूस निकाल लिए जाते हैं, ज्ञापन पत्र देने का दौरे-दौरा चलता है लेकिन उसके बाद सबकुछ पहले की तरह ही बदस्तूर जारी रहता है। आये दिन ही बलात्कार की घटनाएँ बसों-ट्रेनों में छेड़छाड़ की घटनाएँ अखबारों की सुर्खियाँ बनती हैं। हमारे समाज के पाखण्ड की हद देखिये कि एक तरफ तो ‘यत्र नारियस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’ का ढोल पीटा जाता है, ‘‘प्राचीन संस्कृति’’ का यशोगान होता है लेकिन दूसरी तरफ स्त्री विरोधी अपराधों का दोष खुद स्त्रियों पर ही मढ़ दिया जाता है। अभी ज्यादा दिन नहीं हुए जब हरियाणा के मौजूदा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर फरमा रहे थे कि लड़कियों और महिलाओं को कपड़े पहनने की आज़ादी लेनी है तो सड़कों पर निर्वस्त्र क्यों नहीं घूमती! हिन्दू धर्म के तमाम ठेकेदार आये दिन अपने बीमार मानस का परिचय देते रहते हैं, कपड़ों, रहन-सहन और बाहर निकलने को लेकर तो ये बेहूदा बयानबाजियाँ करते हैं लेकिन तमाम स्त्री विरोधी अपराधों के खि़लाफ़ बेशर्म चुप्पी साध लेते हैं। यह हमारे समाज का दोगलापन ही है कि पीड़ा भोगने वालों को ही दोषी करार दे दिया जाता है, नृशंसता के कर्ता-धर्ता अपराधी आमतौर पर बेख़ौफ़ होकर घूमते हैं।

दोस्तो, मानवता को झकझोरने वाले ये जघन्य स्त्री विरोधी अपराध हमारे समाज में होते ही क्यों हैं? और क्या यह महज़ क़ानून और व्यवस्था का मसला है? पहली बात तो यह है ही कि स्त्री विरोधी अपराधों पर तमाम सरकारों को घेरा जाना चाहिए। सरकार का काम ही क्या होता है? यदि वह स्त्रियों को सुरक्षा नहीं दे सकती, हमें शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार नहीं दे सकती तो उसका औचित्य ही क्या है। आज एकजुट होकर तमाम सरकारों को चाहे वह केन्द्र में हो या फिर राज्य में स्त्री सुरक्षा व अपने बुनियादी हक़-अधिकारों के लिए घेरा जाना चाहिए। सरकार एक तरफ तो बेटी बचाओ की नौटंकी करती है लेकिन दूसरी तरफ महिला सुरक्षा के लिए कत्तई गम्भीर नहीं है। दूसरी बात इन स्त्री विरोधी अपराधों का मूल कारण मौजूदा पूँजीवादी व्यवस्था में है। आज के समाज में स्त्रियों को महज़ एक बिकाऊ माल बनाकर रख दिया है जिसे कोई भी खरीद सकता है और नोच-खसोट सकता है। सांसद-विधानसभाओं से लेकर पुलिस थानों तक में बलात्कार और स्त्री विरोधी अपराधियों के दर्शन किये जा सकते हैं। इसके अलावा समाज के पोर-पोर में पैठी पितृसत्ता की मानसिकता भी इस तरह के अपराधों के लिए ज़ि‍म्मेदार है। यह मानसिकता स्त्रियों को केवल भोग की वस्तु और बच्चा पैदा करने की मशीन समझती है। पितृसत्ता स्त्रियों को चूल्हे-चौखट में कैद करके रखना चाहती है। और साथियो ऐसे अपराधों के लिए एक हद तक दोषी हम भी हैं क्योकि हम अपराध और दोषियों के खि़लाफ आवाज नहीं उठाते और मुँह में दही जमाकर बैठे रहते हैं।

आज हम स्त्रियों पर होने वाले बर्बर हमलों को रोकने की उम्मीद सरकारों से, जिनमें खुद बलात्कार के दोषी शामिल हों, उस पुलिस व्यवस्था से जहाँ थानों में भी बलात्कार हो जाते हों और उस न्याय व्यवस्था से जहाँ न्याय अमीरों की बपौती बन गया हो, कत्तई नहीं कर सकते। बेशक हम इन्हें बार-बार घेरेंगे लेकिन स्त्री सुरक्षा का ठेका इनके भरोसे छोड़कर चैन से बैठना आज अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा। नौजवान भारत सभा और दिशा छात्र संगठन का मानना है कि स्त्री विरोधी अपराधों को रोकने की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी हरियाणा और पूरे देश के नौजवानों के कन्धों पर है। हर इंसाफ़पसन्द और बहादुर नौजवान को अपने गाँव, अपने शहर और आस-पास स्त्रियों की समानता के लिए संघर्ष करना चाहिए। हम जानते हैं कि एक बन्द और पिछड़े समाज में हर ऐसे प्रयास को पुरानी कूपमण्डूक सोच से काफ़ी विरोध का सामना करना पड़ेगा। लेकिन उन्हें पीछे नहीं हटना चाहिए और पितृसत्तात्मक गैरजनवादी सोच का हर कदम पर पुरज़ोर और बहादुराना संगठित प्रतिरोध करना चाहिए। याद रखें! जो कौम औरतों को गुलाम बनाती है, वह कौम खुद भी हमेशा गुलामी झेलने को अभिशप्त होती है।

इसके अलावा, खास तौर पर औरतों को संगठित होना चाहिए, अपने संगठन बनाने चाहियें और हर किस्म के पितृसत्तात्मक उत्पीड़न, गैरबराबरी और दमन के खि़लाफ़ जमकर बहादुरी से संघर्ष करना चाहिए। ‘नौभास’ और ‘दिशा’ का स्पष्ट विचार है कि अगर औरतें, और विशेषकर युवा महिलाएँ और छात्राएँ आदि खुद अपने संगठन बनाकर पितृसतात्मक उत्पीड़न के खि़लाफ़ लड़ेंगी नहीं, तो कोई मसीहा उन्हें इस गुलामी से आज़ाद कराने के लिए नहीं आयेगा। हम जानते हैं कि स्त्रियों के लिए यह मुश्किल है और बहुत साहस की माँग करता है, लेकिन फिर भी, यही एक रास्ता है और इस पर हमें चलना ही होगा।

अन्त में, हम सभी भाइयों-बहनों और साथियों का आह्वान करते हैं कि स्त्री-पुरुष असमानता, पितृसत्तात्मक पिछड़ेपन और हर किस्म के दमन-उत्पीड़न के खि़लाफ़ लड़ने के लिए आगे आयें। अगर हम इन अन्धकार की ताकतों के खि़लाफ़ उठ नहीं खड़े होते तो सोचना पड़ेगा कि हम ज़िन्दा भी रह गये हैं या नहीं!

रोहतक में हुए जघन्य काण्ड पर होने वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल हो!

समयः सुबह 11 बजे, तिथिः 13 फरवरी, मानसरोवर पार्क, रोहतक, हरियाणा।

प्रदर्शन के बाद डी.सी. को ज्ञापन सौंपा जायेगा। सरकार से हम निम्नलिखित माँगें करते हैं:

  • इस मामले का फैसला फास्ट ट्रैक कोर्ट के द्वारा जल्द से जल्द किया जाये।
  • घटना की बर्बरता को देखते हुए दोषियों को बिना शर्त मृत्यु दण्ड दिया जाये।
  • ‘‘संस्कृति की रक्षक’’ बनने वाली सरकार स्त्रियों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इन्तज़ाम करे और तमाम स्त्री विरोधी अपराधों को तुरन्त संज्ञान में लेकर सख्त कार्रवाई करे।
  • पीड़िता के परिवार को तुरन्त प्रभाव से उचित मुआवजा दिया जाये।

इंकलाब ज़िन्दाबाद! संघर्ष ज़िन्दाबाद!

पितृसत्ता मुर्दाबाद!   पूँजीवाद हो बर्बाद!   रूढ़िवाद मुर्दाबाद!

  • नौजवान भारत सभा
  • दिशा छात्र संगठन
  • स्त्री मुक्ति लीग

सम्पर्कः 09991908690, 08010156365, 08685030984, E-mail: nbs.haryana@gmail.com,

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