उत्तराखंड: आॅटोलाइन एवं मित्तर फास्टनर्स के मजदूरों का साझा संघर्ष

July 10, 2015

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29 जून, रुद्रपुर, उधमसिंह नगर (उत्तराखंड), औद्योगिक अस्थान सिडकुल में मित्तर फाॅस्टेनर्स एवं
आॅटोलाइन के मजदूरों का साझा प्रदर्शन व धरना कलेक्ट्रेट पर शुरु हो गया है। सिडकुल की इन दो
कंपनियों के एकजुट संघर्ष से श्रम विभाग व शासन-प्रशासन की बेचैनी बढ़ गयी है।

गौरतलब है कि मित्तर फाॅस्टेनर्स के मजदूर विगत 16 जून से अपने निलंबित एवं निष्कासित मजदूरों
की कार्यबहाली को लेकर हड़ताल पर हैं और रुद्रपुर कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठे हैं।

29 जून को ए.डी.एम. की मध्यस्थता में हुई त्रिपक्षीय वार्ता में यह स्पष्ट हो गया कि ए.डी.एम.,
ए.एल.सी. एवं कंपनी प्रबंधन के सुर आपस में मिले हुये हैं। वार्ता में शामिल कांग्रेसी नेता भी
प्रकारान्तर से भरपूर साथ दे रहे थे। वार्ता में सभी इस बात पर सहमत थे कि 2 निलंबित मजदूरों की
कार्यबहाली कर दी जाय परन्तु निष्कासित मजदूर, जिनका मामला श्रम न्यायालय में चला गया है
उनकी कार्यबहाली न कर उनका भविष्य ‘श्रम न्यायालय’ पर छोड़ दिया जाय। कंपनी प्रबंधन 2
निलंबित मजदूरों की कार्यबहाली भी इस शर्त के साथ करने की बात कर रहा था कि उनके खिलाफ
घरेलु जांच जारी रहेगी।

इंकलाबी मजदूर केन्द्र, जो मित्तर फास्टेनर्स के मजदूरों के संघर्ष में शुरु से सहयोग दे रहा है, ने
मजदूरों को कंपनी प्रबंधन व श्रम विभाग के गठजोड़ के खिलाफ आगाह किया। इमके कार्यकर्ताओं ने
मजदूरों को समझाया कि कंपनी प्रबंधन द्वारा संराधन वार्ताओं के दौरान मजदूरों को निष्कासित
करने की कार्यवाही की वैधानिकता पर निर्णय देने के लिए ए.एल.सी. ने श्रम विभाग से जानकारी
मांगी है। जानकारी की बातों में शामिल है कि संराधन वार्ता के दौरान मजदूरों के निष्कासन की
प्रक्रिया उत्तर प्रदेश औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 6E का उल्लंघन है या नहीं ? ऐसे
में कोर्ट को केवल इस पर निर्णय देना है कि प्रबंधन द्वारा 6E का उल्लंघन किया गया है या नहीं, न
कि मजदूरों के निष्कासन एवं मजदूरों पर लगे आरोपों पर। इसलिए वार्ता के दौरान मजदूर प्रतिनिधि
अवैध निष्कासन का मुद्दा उठा सकते हैं। इसके साथ ही इमके कार्यकर्ताओं ने मजदूरों को यह
समझाया कि हड़ताल के दौरान अवैध रूप से ठेका मजदूरों द्वारा कंपनी चलाये जाने के खिलाफ
ए.एल.सी. द्वारा कंपनी को नोटिस देने के बावजूद कंपनी द्वारा ठेका मजदूरों से उत्पादन कराये जाने
की शिकायत कर कंपनी में उत्पादन बंद करने की मांग को मुख्य मुद्दा बनाया जाय तथा कृष्णपाल
नामक मजदूर की पिटाई करने वाले प्रबंधकों की गिरफतारी की मांग की जाय। इसके साथ इमके
द्वारा मजदूरों को यूनियन पंजीकरण की फाइल तुरंत लगाने की सलाह दी।

29 जून से मित्तर फाॅस्टेनर्स के मजदूरों के साथ कलेक्ट्रेट पर संयुक्त तौर पर धरने पर बैठने वाले
आॅटोलाइन कंपनी के मजदूरों ने प्रबंधन के छल एवं वादाखिलाफी के चलते अंततः निर्णायक संघर्ष के
लिए कमर कस ली है। इससे पूर्व आटोलाइन के समस्त मजदूरों ने 28 जून से कार्य के दौरान काला फीता
बांधकर मौन धारण कर एवं मांगो के समर्थन में चेस्ट कार्ड लगाकर अपने संघर्ष को आगे बढ़ाया है। 29
जून को अपने 13 निलंबित पदाधिकारियों एवं सदस्यों की कार्यबहाली एवं मांगपत्र पर सुनवायी
करने की मांग को लेकर यूनियन द्वारा प्रबंधन को हड़ताल का पूर्व नोटिस प्रेषित कर दिया गया है।
अभी मजदूर फैक्टरी के अंदर व बाहर दोनों जगह सांकेतिक संघर्ष जारी रखे हैं। 13 यूनियन
पदाधिकारियों एवं सदस्यों के अलावा शिफ्ट के अनुरुप एवं डयूटी छूटने के बाद बाद मजदूर इस धरने में
शामिल होते हैं। फिलहाल आटोलाइन के मजदूरों का संघर्ष आगे बढ़ता प्रतीत हो रहा है। धरने पर बैठे
दोनों कंपनियों के मजदूर एक दूसरे से प्रेरणा व ऊर्जा ग्रहण कर रहे हैं। सिडकुल पंतनगर में मजदूर आंदोलनों
के लिए यह काफी सकारात्मक है।