रिहाई मंच: केंद्र और प्रदेश सरकारों की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ चलेगा इंसाफ अभियान

October 20, 2015

लखनऊ 20 अक्टूबर 2015। रिहाई मंच केंद्र और प्रदेश सरकार की गरीब विरोधी
आर्थिक नीतियों, किसानों की दुर्दशा, साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति
और कमजोर तबकों को सामाजिक अधिकार से वंचित किए जाने की साजिशों के खिलाफ
दूसरे संगठनों के साथ मिलकर इंसाफ अभियान चलाएगा। इसका निर्णय मंच केे
कार्यालय पर हुई बैठक में लिया गया।

रिहाई मंच द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब
ने कहा है कि इस अभियान के तहत संगठन दलित और मुस्लिम हिंसा से प्रभावित
तमाम इलाकों का दौरा कर वहां आंदोलन संगठित करने के साथ ही इन तबकों की
सुरक्षा के लिए संवैधानिक उपाय मुहैया कराने की मांगों को लेकर लोगों को
गोलबंद करेगा। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ होने वाली
साम्प्रदायिक हिंसा का चरित्र संस्थाबद्ध हो चुका है जिसे राज्य का खूला
संरक्षण मिलता है। जिसमें पुलिस की भूमिका खुद सरकारी जांच आयोगों के
मुताबिक या तो हमलावरों को मौन समर्थन का रहा है या पीडि़तों के खिलाफ
हिंसा में शामिल होने का रहा है। ऐसे में निहत्थे अल्पसंख्यकों को मरता
हुआ छोड़ दिया जाना गैरलोकतांत्रिक ही नहीं अमानवीय भी है। उन्होंने कहा
कि मुजफ्फरनगर में हुई मुस्लिम विरोधी जनसंहार में वहां के डीएम द्वारा
दो महीने पहले से ही हमलवरों की एक जाति विशेष को बड़े पैमाने पर असलहों
के लाइसेंस जारी किए गए थे जिसका इस्तेमाल मुसलमानों के खिलाफ किया गया।
ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि मुसलमानों की सुरक्षा की गारंटी देने में
विफल हो चुका राज्य उनको असलहों के लाइसेंस जारी करे ताकि ऐसे जनसंहारों
पर रोक लग सके। इसके अलावा अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए दलित ऐक्ट की
तरह माइनाॅरिटी ऐक्ट बनाए जाने और मिश्रित आबादी को बढ़ावा देने के लिए
सिंगापुर की तरह मिश्रित रिहाईश कानून बनाया जाए जहां अलग-अलग मजहबों और
जातियों के लोगों को मकान आवंटित करना अनिवार्य बनाया जाए। ताकि अलग-अलग
धर्मों और जातियों के लोग एक दूसरे की संस्कृतियों को करीब से समझ पाएं
और उनमें एक दूसरे के खिलाफ काल्पनिक पूर्वाग्रह और द्वेष जगह न बना
पाएं।

रिहाई मंच नेता राजीव यादव ने कहा कि इसी तरह दलितों की सुरक्षा
सुनिश्चित करने में फेल हो चुके राज्य को चाहिए कि वो महिला थानों की तरह
ही दलित थानों को स्थापित करे, बिहार में दलित विरोधी जनसंहारों के बाद
जिस तरह दलितों को हथियारों के लाइसेंस दिए गए उसी तरह उत्तर प्रदेश में
भी खास कर बुंदेलखंड में दलितों को असलहों के लाइसेंस दिया जाएं क्योंकि
हमीरपुर, जालौन, बांदा, झांसी, ललितपुर, औरैया, इटावा आदि दलितों के लिए
नर्क बन गए हैं जहां बात-बात पर दलितों को जिंदा जला दिया जा रहा है। ऐसे
में यह जरूरी हो जाता है कि उस पूरे क्षेत्र को दलित उत्पीडि़त क्षेत्र
घोषित कर दलितों को सुरक्षा के विशेष उपाय किए जाएं और इसके लिए विशेष
पैकेज दिया जाए। उन्होंने कहा कि इन सवालों को उठाने के साथ ही इंसाफ
अभियान फसल बर्बाद होने के कारण मौत का शिकार हुए 500 से अधिक किसानों को
किस तरह सरकारों ने ठगा और छोटे और मझौले व्यापारियों को किस तरह विदेशी
कारपोरेट पूंजी के सामने मरने के लिए छोड़ दिया गया है, यह भी किसानों
और व्यापारियों को बताएगा। उन्होंने कहा कि इंसाफ अभियान बुनकरी के तमाम
इलाकों में दौरा कर पिछले दो दशकों से विभिन्न रंगों के झंडे वाली
सरकारों द्वारा उन्हें बर्बाद करने की नीतियों को उजागर करेगा।

रिहाई मंच के प्रवक्ता शाहनवाज आलम ने बताया कि इस अभियान को संचालित
करने के लिए जिलों जिलों में इंसाफ अभियान की इकाईयां गठित करने के लिए
संगठन के नेता दौरे कर रहे हैं। जो एक प्रदेश व्यापी कोर कमेटी के
निगरानी में किया जा रहा है। जिसमें राजीव यादव को अध्यक्ष, दिनेश चैधरी
को महासचिव, चार उपाध्यक्ष सरफराज कमर अंसारी, विनोद यादव, आफाक उल्ला
लश्करी, हरे राम मिश्र, दो सचिव अवधेश यादव और गुफरान सिद्दीकी, दो संगठन
मंत्री लक्ष्मण प्रसाद और तारिक शफीक, प्रवक्ता अनिल यादव, प्रचार
प्रबंधन फैजान मुस्तफा, शाह आलम राना, अभियान प्रभारी राघवेंद्र प्रताप
सिंह, जैद फारूकी व संरक्षक मंडल में मोहम्मद शुऐब, आदियोग, मसीहुद्दीन
संजरी को रखा गया है।

शाहनवाज आलम
(प्रवक्ता, रिहाई मंच)