Gurgaon-Manesar automobile workers continue struggle …

December 18, 2015

Gurgaon Update from BELSonika

by Sanhati Correspondent

बिगत साल भर से बर्खास्त बेलसोनिका, मानेसर मज़दूरों को जब श्रम बिभाग के असिस्टेंट लेबर कमिश्नर द्वारा जब बर्खास्तगी को गैरकानूनी करार का आदेश पारित कर काम पर बापिश लेने का आदेश दिया गया तब भी प्रबंधन ने बर्खास्त ४० श्रमिकों को काम पर बापिस ना लेकर हाईकोर्ट जाने का ऐलान किया . हाईकोर्ट में बेलसोनिका प्रबंधन ने एक श्रमिक को काम पर बापिस न लेने के लिए स्टे आर्डर माँगा हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया .लेकिन प्रबंधन उसके बावजूद भी श्रमिकों को काम पर न बापिश लेने पर अड़ा हुआ है . इस बाबत जब ट्रेड यूनियनों का एक प्रतिनिधिमंडल गुडगाँव के डी सी से मिला जिसमे सनबीम ,मारुती मानेसर ,मारुती गुडगाँव ,एफसीसी रिको ,नपीनो ,इमके ,मज़दूर सहयोग केंद्र, बेलसोनिका के बर्खास्त मज़दूर ,सोना स्टीयरिंग आदि यूनियनों के प्रतिनिधि शामिल थे , गुडगाँव के डीसी से इस प्रतिनिधिमंडल ने हाईकोर्ट के ऑर्डर को लागू कराने की मांग की तो डी सी ने धमकाते हुए कहा की ए एलसी से बो कहेंगे की दोनों पक्षों को बात कर मामले को सुल्ताएँ जब मज़दूरों ने कहा की मामला सुल्ताने का नै बल्कि होईकोर्ट के ऑर्डर को लागू करने का है इस पर डी सी ने धमकाते हुए कहा की तुम्हे हिन्दी मैं समझह मैं आता है की नहीं कल को फैक्ट्री अगर चली जाएगी तो सभी मज़दूर बेरोज़गार हो जायेंगे .हम कह रहे हैं की हम शीघ्र मामले को सुल्ताने को अ ल सी से कहेंगे . कुल मिलाकर बेलसोनिका के मज़दूरों को इस दफ्तर से उस दफ्तर इस कोर्ट से उस कोर्ट तक दौड़कर थकाया जा रहा है . डी सी की धमकी से साफ़ है की प्रसासन फैक्ट्री प्रबंधन के साथ खडा है ,पहले तो मज़दूर कोर्ट में जाने से डरता है और यदि चला बी गया तो सालों साल के कोर्ट के धक्के उसे न्याय की जगह सजा ही साबित होते हैं . यदि किसी मामले में मजदूर प्रबंधन का पीछा इस कोर्ट से उस कोर्ट तक करने मैं सफल हो जाते हैं तो पूंजीवादी व्यवस्था के दुसरे हिस्से उसे लागू नै करबाटे हैं . इस घटना के बाद मुझे फरीदाबाद ईस्ट इण्डिया कॉटन मिल के मजदूर के केश का मामला याद हो आया .इन मजदूर साथी ने कोर्ट मैं हाजिर न होने पर प्रबंधक मालिक के बिरुद्ध गिरफ्तारी वारंट ले लिया लेकिन कोई पुलिस अधिकारी ने उस मालिक को गिरफ्तार करने तथा वारंट को तामील कराने से जब मना कर दिया तो वो मज़दूर किसी और केस मैं उसी कोर्ट मैं हाजिर हुए मालिक को देखकर जज साहब को बोला साहब ये आपके द्वारा जारी वारंट रहा और ये जो कडा हुआ आदमी ये ही मुलजिम है पुलिस इसे गिरफ्तार नै कर रही है आप इसे गिरफ्तार करा दो . इस पर जज ने उस मज़दूर को धमकाया की कोर्ट के बाहर जाओ नै तो कोर्ट की अबमानना का केस लगा दूंगा .कुल मिलाकर मज़दूर के पक्षः में दिए गए निर्णय केवल कागद का पुर्जा से ज्यड्डा कोई हैसियत नै रखते हैं.ईकोर्ट के जज ने बहस के दौरान फैक्ट्री प्रबंधन से कहा था की मुख्य बात ये है की तुमसे एक अधिकारी नहीं खरीदा गया .
बेलसोनिका के मज़दूरों ने अपनी लड़ाई मुख्य तौर पर कानूनी तरीके से लड़ी थी उनका गुनाह केवल इतना था की उन्होंने अपनी फैक्ट्री मैं यूनियन बनाने की जुर्रत की थी जिसके लिए भी उन्हें हाईकोर्ट तक जाना पड़ा था लेकिन साल भर से ज्यादा होने को आया है फिर भी मज़दूरों को सड़कों पर ला खड़ा कर दिया गया है एक साल हो गए हैं कानूनी लड़ाई लड़ाई लड़ते हुए और कानूनी तौर पर जीतने के बावजूद भी उस आर्डर को लागू करने को कोई सासन तंत्र तैयार नहीं है सासन प्रसासन को देश के ककानून की चिंता नै है उसे चिंता है तो केवल फैक्ट्री प्रबंधन की . और ऊपर से बहाना ये की कहीं फैक्ट्री भाग न जाये ,ऐसे में मारुती ,ग्रेजियनों ,प्रिकाल जैसी घटनाएँ न होंगी तो और क्या होगा .

Also see – Workers from Gurgaon-Manesar belt rally against labour law reforms

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Reporting of the day from Amit (WSC, Gurgaon):

Gurgaon-Manesar automobile workers continue struggling against ongoing attacks of company-administration judiciary…

Workers from Belsonica, a vendor of Maruti and situated inside four walls of Maruti Manesar plant, organized a protest meeting and deputation to Gurgaon DC today. Last year when the workers filed application for union registration on 10 October, the management on the very same date suspended 45 workers and thereafter dismissed them to crush the union. The workers after a legal battle have won the case pending before ALC and the High Court recently. But the management just refused to abide by the order to take back the workers. The administration also is paying a deaf ear to implement the order. The same administration wastes no time to suppress workers when there is an anti-worker order, which is generally the norm. Today Union body from Maruti Suzuki Workers Union, Manesar, Maruti Udyog Kamgar Union, Gurgaon, Hero MotoCorp Dharuhera, Hero MotoCorp Gurgaon, Honda Manesar, Sunbeam, FCC Rico, Napino Auto, Sona Steering, IMK, Mazdoor Sahyog Kendra (WSC) stood in solidarity with the Belsonica workers. Gurgaon DC adviced the delegation to be ‘flexible’ so that industry stays here, with no commitment to implement the order. Militant struggle is the only answer for these people!

Yesterday Hero MotoCorp Gurgaon plant management terminated the job of 16 contract workers without notice or reason. These workers are working in the main production for last 5-6 years. The workers refused the meager compensation offered by the company.

Gurgaon court yesterday rejected the appeal of the counsels defending Maruti workers to summon ten witnesses to cross them again. Earlier, the Court also rejected the appeal of the workers to ask the Maruti management to produce CCTV footage and attendance record of 18 July 2012. According to the management these documents got destroyed. However the server in Gurgaon preserves all such records. If available, these documents could prove that many in jail were not at all present at that day.

Against attacks of company-administration-judiciary nexus, the workers of different plants today emphasized the need for larger solidarity. Workers from different unions decided that a joint deputation will be submitted to the DC Gurgaon against the anti-worker judgment in the 2009 Pricol workers case on next Tuesday at 11 am.

Long live the struggle against all exploitation and oppression!