इंकलाबी मजदूर केन्द्र का चौथा सम्मेलन संपन्न

March 12, 2016

मजदूर आंदोलन की क्रांतिकारी विरासत को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ
इंकलाबी मजदूर केन्द्र का चौथा सम्मेलन संपन्न

इंकलाबी मजदूर केन्द्र का चौथा सम्मेलन 5-6 मार्च को फरीदाबाद के वैश्य धर्मशाला में संपन्न हुआ।

सम्मेलन का आरंभ इंकलाबी मजदूर केन्द्र के अध्यक्ष कैलाश भट्ट ने झंडोत्तोलन कार्यक्रम में इंकलाबी मजदूर केन्द्र का झंडा फहराकर किया।
 

इस अवसर पर इमके अध्यक्ष ने कहा कि इंकलाबी मजदूर केन्द्र एक ऐसे समय में अपना सम्मेलन कर रहा है जब विश्व पूंजीवादी व्यवस्था लम्बे समय से संकटग्रस्त है। साम्राज्यवादी-पूंजीवादी मुल्कों के शासक अपने इस संकट का बोझ मजदूर वर्ग पर डाल रहे हैं तथा पूंजी के हित में एक से बढ़कर एक मजदूर विरोधी व जनविरोधी नीतियां लागू कर रहे हैं। इसके साथ ही दुनिया भर के शासक फासीवादी ताकतों को बढ़ावा देकर मजदूर-मेहनतकश जनता को बांटने की साजिश रच रहे हैं। भारत में एकाधिकारी पूंजीपति वर्ग द्वारा हिन्दू फासीवाद के साथ  गठजोड़ से सत्ता में आयी आयी नरेन्द्र मोदी सरकार जहां पूंजीपति वर्ग को लूट की खुली छूट दे रही है वहीं मजदूर वर्ग के सारे श्रम अधिकारों को खत्म करने अथवा निष्प्रभावी बनाने पर तुली है। इसके साथ ही संघी लंपट तत्वों द्वारा पूरे देश में अल्पसंख्यकों व दलितों के खिलाफ हमले तेज हो गये हैं। उन्होंने कहा कि आज मानवता के सामने दो ही विकल्प हैं-समाजवाद अथवा फासीवाद। मजदूर वर्ग अगर पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष तेज नहीं करता तो फासीवादी ताकतें मानवता को गंभीर संकट व त्रासदी की ओर धकेलने के लिए तैयार बैठी हैं। उन्होंने मजदूरों के श्रम अधिकारों की रक्षा के लिए पुरजोर  संघर्ष करने व हिन्दुत्ववादी फासीवादी मुहिम के खिलाफ जोरदार प्रतिरोध खड़ा करने  को आज का फौरी कार्यभार बताया तथा पूंजीवाद-साम्राज्यवाद के खिलाफ संघर्ष तेज करते हुए समाजवाद की स्थापना के लिए मजबूत कदमों से
आगे बढ़ने का  आह्वान किया।
अध्यक्षीय संबोधन के बाद सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत हुई। सम्मेलन के पहले दिन राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों का लेखा-जोखा लेते हुए सम्मेलन द्वारा एक राजनीतिक रिपोर्ट पारित हुई। राजनीतिक रिपोर्ट में अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों पर विचार करते हुए सम्मेलन के प्रतिनिधियों ने पूरी दुनिया के स्तर पर पूंजीवाद के संकट पर गहन चर्चा की। सभी प्रतिनिधियों ने इस बात पर सहमति जतायी कि विश्व पूंजीवाद के वर्तमान संकट ने यह साबित किया है कि पूंजीवाद एक चिरंतन
संकटग्रस्त व्यवस्था है, कि वर्तमान संकट विश्व पूंजीवाद के लिए एक सर्वग्रासी संकट है। अपने इस संकट को हल करने के लिए साम्राज्यवादी मुल्क ओर एक जहां अपने यहां मजदूरों को लगातार अधिकारविहीन कर  श्रम  के शोषण व लूट को और बढ़ा रहे हैं, मज़दूर वर्ग की समस्त सुविधाओं को खत्म करने पर तुले हैं तथा मज़दूर संघर्षों व जन संघर्षों का क्रूर दमन कर रहे है वहीँ दूसरी ओर वे घोर प्रतिक्रियावादी तत्वों को पालते -पोसते  व शह देते रहे हैं। साम्राज्यवाद विरोध को मजदूर वर्ग का एक अहम कार्यभार घोषित करते हुए सम्मेलन ने साम्राज्यवाद खासकर अमेरिकी साम्राज्यवाद व उसके
सहयोगियों की लूट, आक्रमण व हस्तक्षेपकारी नीतियों का पुरजोर विरोध करने का संकल्प लिया।
इसी क्रम में रिपोर्ट के राष्ट्रीय परिस्थितियों वाले हिस्से पर बातचीत करते हुए सम्मेलन के प्रतिनिधियों ने मोदी सरकार द्वारा श्रम कानूनों में मज़दूर विरोधी बदलाव करने की मोदी सरकार की घोर आलोचना की। इसके अलावा प्रतिनिधियों ने मोदी सरकार की साम्राज्यवाद-पूंजीवाद परस्ती की भर्त्स्ना करते हुए मोदी सरकार मजदूर विरोधी नीतियों का पुरजोर विरोध करने का संकल्प व्यक्त किया। वक्ताओं ने संघी हिन्दुत्ववादी फासीवाद के खतरे के प्रति सचेत रहते हुए इसके खिलाफ मजदूर वर्ग की व्यापक गोलबंदी को आज के दौर का एक बेहद जरूरी कार्यभार बताया। जे.एन.यू. के छात्रों के दमन की घटना का तीखा विरोध करते हुए वक्ताओं ने जे.एन.यू. के संघर्षरत छात्रों के प्रति एकजुटता व्यक्त की तथा उनके विरुद्ध देशद्रोह के फर्जी मुकदमों का विरोध करते हुए संघ परिवार के छद्म राष्ट्रवाद का जनता के बीच पर्दाफाश करने का संकल्प वयक्त किया। देश में अल्पसंख्यकों व दलितों पर बढ़ते हमलों के खिलाफ चिंता जाहिर करते हुए सम्मेलन के प्रतिनिधियों ने इस सबके खिलाफ मजदूर-मेहनतकश जनता के व्यापक प्रतिरोध के निर्माण की जरूरत पर बल दिया।
सम्मेलन द्वारा कुछ सुझावों व संशोधनों के साथ राजनीतिक रिपोर्ट को सर्वसम्मति से पारित किया गया। इसके बाद सांगठनिक रिपोर्ट पर चर्चा की गयी। सांगठनिक रिपोर्ट पर चर्चा करते हुए प्रतिनिधियों ने संगठन के सकारात्मक व नकारात्मक दोनों पहलुओं पर बात की तथा सकारात्मक को आगे बढ़ाने व नकारात्मक से छुटकारा पाने के लिए पुरजोर कदम उठाने का संकल्प लिया। सम्मेलन के प्रतिनिधियों ने यह स्वीकार किया कि मजदूर वर्ग के कई  जुझारू संघर्ष लड़ने के बावजूद खुद को मज़दूरों के एक क्रांतिकारी ट्रेड यूनियन केन्द्र  के  रूप  में  रूपांतरित करने तथा  मजदूर वर्ग को वर्गीय आधार पर लामबंद करने में हम अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पा रहे हैं। सिद्धान्त में दृढ़ता व व्यवहार में लचीलेपन के  सिद्धांत को हम कारगर रूप से नहीं लागू कर पा रहे हैं। इसके साथ ही सम्मेलन के प्रतिनिधियों ने यह माना कि संगठन के सदस्यों में अपेक्षित राजनीतिक सजगता व राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय महत्व की घटनाओं पर त्वरित कार्यवाही के मामले में अभी काफी समस्याएं हैं। अंततः अपनी कमजोरियों-खामियों को बेबाक रूप में स्वीकार कर यथासंभव इनसे निजात पाने  हेतु  गंभीर प्रयास करने और  मजदूर वर्ग के संघर्षों को आगे बढ़ाने तथा मजदूर वर्ग की वर्गीय लामबंदी का संकल्प व्यक्त करते हुए सभी प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से सांगठनिक रिपोर्ट को पारित किया।  
इसके उपरांत सम्मेलन द्वारा समसामयिक घटनाओं के संबंध में कुछ प्रस्ताव परित किये। सर्वप्रथम पिछले समयों में मुक्ति, जनवाद व अपने हक-अधिकारों के लिए दुनिया भर में शहीद हुए मजदूरों-मेहनतकशों को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गयी। शहीदों की याद में सम्मेलन ने दो मिनट का मौन  रखा तथा शहीदों के सपनों को जिंदा रखने का संकल्प व्यक्त किया। इसके अलावा निम्न  6 अन्य प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुए:-  

  • मोदी सरकार द्वारा श्रम कानूनों में व्यापक बदलाव के खिलाफ प्रस्ताव
  • हिन्दू फासीवाद  के बढ़ते हमले के खिलाफ प्रस्ताव
  • भारत सरकार द्वारा नेपाल की अघोषित नाकेबंदी के खिलाफ प्रस्ताव 
  • मध्यपूर्व में साम्राज्यवादी हमलों के खिलाफ प्रस्ताव
  • देश भर में बढ़ रही जाति-उत्पीड़न की घटनाओं के खिलाफ प्रस्ताव
  • देशभर में शिक्षा के बाजारीकरण व भगवाकरण के खिलाफ चल रहे छात्रों के संघर्षों के समर्थन तथा उनके साथ एकजुटता जाहिर करते हुए प्रस्ताव
  
सम्मेलन के दूसरे दिन सम्मेलन के सर्वोच्च निकाय केन्द्रीय परिषद एवं अध्यक्ष का चुनाव हुआ। साथी कैलाश भट्ट सर्वसम्मति से पुनः संगठन के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। केन्द्रीय परिषद द्वारा साथी खीमानन्द संगठन के महासचिव निर्वाचित हुए। 
6 मार्च को दोपहर दो बजे से सम्मेलन का खुला सत्र प्रारंभ हुआ। खुले सत्र का आरंभ  प्रगतिशील सांस्कृतिक मंच द्वारा प्रस्तुत क्रांतिकारी गीत ‘‘मजदूर आ, किसान आ, ऐ छात्र नौजवान आ ! तुझे सितम की सरहदों के पर अब निकलना है, जमाने का बदलना है, जमाने का बदलना है‘‘ से हुई।
खुले सत्र में सर्वप्रथम सम्मेलन द्वारा निर्वाचित अध्यक्ष कैलाश भट्ट ने खुले सत्र में भागीदारी कर रहे साथियों को सम्मेलन की पूरी कार्यवाही व सम्मेलन द्वारा तय कार्यभारों एवं विभिन्न प्रस्तावों द्वारा लिए गये संकल्पों के बारे में अवगत कराया। अपने ओजपूर्ण भाषण में उन्होंने एक बार फिर मोदी सरकार को मजदूर विरोधी, किसान विरोधी व जनविरोधी करार दिया। उन्होंने आत्महत्या करने वाले किसानों की मौत का कारण प्रेम प्रसंग बताने वाले भाजपा नेताओं व संघ मंडली को असली देशद्रोही बताया। उन्होंने बताया कि संघ परिवार का इतिहास आजादी के आंदोलन के समय से ही साम्राज्यवादियों की चमचागिरी व देश से गद्दारी का रहा है और आज मोदी सरकार अमेरिका सहित दुनिया भर के साम्राज्यवादियों के समक्ष  देश की संप्रभुता को गिरवी रख रही है,प्राकृतिक संसाधनों को लुटा रही है, देश को विदेशी पूंजी की खुली चारागाह बना रही है तथा इस देश के मजदूर-मेहनतकशों के खून व पसीने को अधिकाधिक निचोड़ने और बेचने पर तुली हैं। उन्होंने श्रम कानूनों के खिलाफ तथा हिन्दू साम्प्रदायिक फासीवाद के खिलाफ पुरजोर संघर्ष करने के इंकलाबी मजदूर केन्द्र के दृढ़ संकल्प को व्यक्त किया। इसी के साथ उन्होंने पूंजीवाद-साम्राज्यवाद के खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान  किया।  
खुले सत्र को इफ्टू के साथी अनिमेष दास, ए.आई.एफ.टी.यू.(न्यू) के साथी जगदीश, क्रांतिकारी नौजवान सभा के साथी नयन ज्योति, जन संघर्ष मंच, हरियाणा के साथी सी.डी. शर्मा, प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र की अध्यक्ष शीला शर्मा, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के महासचिव साथी भूपाल, पिपुल्स यूनियन फाॅर डेमोक्रेटिक राइट के साथी मनजीत एवं पिपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रण्ट  आॅफ इंडिया के साथी अर्जुन प्रसाद सिंह, प्रोवीजनल कमेटी, मारुति सुजुकी वर्कर्स यूनियन के साथी सतीश व सामाजिक कार्यकर्ता  शैलेन्द्र सिंह सहित विभिन्न यूनियन प्रतिनिधियों ने संबोधित किया। सम्मेलन और खुले सत्र में भागीदारी करने वाले विभिन्न यूनियनों में -भेल मजदूर ट्रेड यूनियन,(हरिद्वार ) आॅल वीनस इंडस्ट्रियल काॅरपोरेशन वर्कर्स यूनियन , सन फ्लैग हॉस्पीटल वर्कस यूनियन, शील पैकेजिंग वर्कर्स यूनियन (फरीदाबाद),रिचा मजदूर संगठन(काशीपुर,उत्तराखण्ड )  , ब्रिटानिया श्रमिक संगठन, इंटार्क श्रमिक संगठन, आॅटोलाइन इंडस्ट्रीज वर्कर्स यूनियन (सिडकुल पन्तनगर,उत्तराखंड),उत्तराखंड वन निगम स्केलर संघ, सनबीम वर्कर्स  यूनियन(गुडगाँव),  होंडा मोटर साइकिल प्लांट,  टपूकड़ा (भिवाड़ी  ,राजस्थान) ,  मार्केट वर्कर्स एसोसिएशन, टैंपो चालक व ऑटो रिक्शा यूनियन, पैरा मेडिकल वर्कर्स यूनियन (बरेली), ठेका मजदूर कल्याण समिति एवं नरेगा मजदूर संघर्ष समिति  आदि के प्रतिनिधि शामिल थे।

सम्मेलन के खुले सत्र में प्रगतिशील सांस्कृतिक मंच द्वारा हिन्दू फासीवाद व एकाधिकारी पूंजीवाद के गठजोड़ का खुलासा करते हुए एक नाटक प्रस्तुत किया गया।
शाम 6 बजे सम्मेलन स्थल से स्थानीय बी.के. चौक  तक एक जुलूस निकाला गया। जुलूस के दौरान श्रम काूननों में संशोधनों के खिलाफ, पूंजीवाद-साम्राज्यवाद  के खिलाफ तथा हिन्दू फासीवाद के खिलाफ जबर्दस्त नारेबाजी की गयी। जुलूस के वापस सम्मेलन स्थल पर पहुंचने पर अध्यक्ष साथी कैलाश भट्ट द्वारा सम्मेलन की समाप्ति की घोषणा की गयी।