Justice for Tara: Trans woman and outreach worker burnt alive before police station in Chennai

November 14, 2016

JUSTICE FOR TARA, Organized by Delhi Queer Pride. Jantar Mantar, November 14, 6 pm.
We are outraged at the death of Tara, a 28 year old trans woman and outreach worker who was burnt alive before the Pondy Bazar police station in Chennai, and succumbed to her injuries at the Kilpauk Medical College Hospital on the morning of 9 November 2016.

This happened after the police on their rounds at 4 am seized her vehicle and phone and incited her to go kill herself when she pleaded for justice. The police themselves have videos of them hurling transphobic abuse at her and we do not know what other forms of harassment they might have meted out to her at the station, since they are refusing to hand over CCTV footage of the proceedings there.


There is also police video footage of her pleading and attempting self harm, and the police telling her to “get out, go and die”, instead of acting responsibly and ensuring she came to no harm. Soon after she was found with 90% burns in front of the police station and mysteriously there is no footage whatsoever of the events leading to this. Before her death she named police humiliation as the key factor.

Several alarming and vital questions are raised by this:

1. The police claim that Tara has committed suicide. What is the reason for her suicide besides police persecution and humiliation?

2. If she indeed committed suicide, why did she do in front of the police station? Why did the police not take preventive action when she immolated herself. When she tried to self harm, why didn’t the police offer her first-aid or prevent her from attempting suicide?

3. When the whole country was unable to access money resources the 500 and 1000 rupees fiasco, where did the petrol come from?

4. Why was Tara’s mobile snatched from her rendering her helpless?

5. When someone dies in a public spot, the spot would be marked before removing their body. Why isn’t there any mark from where Tara was taken?

6. When they released so many video proof from that wee hours, why did they not record the incidents that lead to Tara’s immolation? When asked for CCTV footage, we were informed that the CCTV wasn’t working from 27 October 2016. If that is the case, 29th October 2016 was Deepavali, did they not have a functioning CCTV in a major spot in the city where thousands of people gather?


Trans activists and allies who went to the Police Commissioner’s office in Chennai to demand action were harassed and illegally detained on Nov 10th. The police and Tamil Nadu government must be held responsible for this. We will agitate until the guilty are held responsible and punished.


We demand that:

1. The culprits of Tara’s death be punished after a proper enquiry

2. The police must be strictly given directions to not harass trans people and any erring officer must be suspended from service and criminal action should be taken against them. Meanwhile hijras face daily harassment from the public and the police need to take cognisance and address these law and order issues instead of dismissing the concerns of trans people and harassing them instead.

3. An atrocities act that covers crimes against trans people to be passed and implemented or included in the Rights of Transgender persons Bill, 2014 with its other excellent provisions of reservations, etc. put forward by Tiruchi Siva, passed in the Rajya Sabha and now in the Lok Sabha. The Rights of Transgender persons bill 2016 of the GOI has watered down these provisions and further more has criminalised trans women who have no livelihood options other than organized begging. This bill which is supposedly about trans rights should be scrapped and the Rights of Transgender persons Bill, 2014 ahould be passed by the Lok Sabha into law.

4. Strict action should be taken against shows like Bathuku Jatka Bandi hosted by Zee Telugu and hosted by TV 9 which incite violence and abuse against transgender and lesbian people.

5. Employment and housing facilities must be provided by the govt to trans people to ensure right to life and livelihood. A lone homeless kothi was killed a month ago in Hyderabad and in the name of her murder investigation the police is harassing the hijra community. With another homeless trans woman found dead in Bangalore yesterday, the number of people in the trans community dying of systemic and structural violence piles up as the NALSA judgement remains on paper without implementation. Implement the NALSA Supreme Court judgment immediately!

6. All criminalising provisions used to target trans people like the beggary act, ITPA, public nuisance, public indecency, Sec 377 should be immediately repealed.

Enough criminalisation! Enough structural violence! Enough police custodial violence!!!

Contact: Bittu 8179542651

Organized by: Delhi Queer Pride Place: Jantar Mantar, Delhi Time: November 14, 6 pm


तारा को न्याय दो! हिज्रा किन्नरो के उपर पुलिस दमन बन्द करो!

तारा, 28 साल कि एक हिज्रा ट्रांसजेन्डर महिला थी (तमिल मे तिरुनङ्गै) जो 9 नवंबर 2016 की सुबह को चेन्नई में पोंडी बाजार पुलिस स्टेशन के सामने जिंदा जला दिये गये थे । उनको जब तक किल्पौक मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुञ्चाया गया तब तक उसकी मौत हो गई। तारा एक आउटरीच कार्यकर्ता थी जो हिज्रा समुदाय को मदद करती थी ।

सुबह 4 बजे को पुलिस ने तारा की २ व्हीलर वाहन और फोन जब्त कर लिया और जब तारा उन्से बात करने के लिये स्टेशन गयी तो पुलिस ने उनको हिज्रा होने के बात पे अपमान किया और गालिया दिया। पुलिस ने खुद वीडियो बनाया है जिस्मे इस्का सबूत है कि पुलिस ने उनको गाली देके बोले की जाके मर जाओ, और तारा को खुद को मारने के लिए उकसाया। और हम नहीं जानते कि उनके साथ और क्या उत्पीड़न हुआ स्टेशन मे, क्योंकि पुलिस स्टेशन का सीसीटीवी फुटेज नही मिल रहा है।

पुलिस केहते है कि तारा ने खुद को मारने कि कोशिश की, तब पुलिस ने जिम्मेदारी से उसे बचाने के बजाय “बाहर निकल, जाके मरॊ” बोले। इसके बाद वह पुलिस स्टेशन के सामने 90% जला हुआ हालात मे पायी गयी और अस्पताल में उनके मौत से पहले तारा ने बोला कि पुलिस अपमान उनके मरने का मुख्य कारन है। कई महत्वपूर्ण सवाल है:

1. पुलिस का दावा है कि तारा ने आत्महत्या की है। पुलिस उत्पीड़न और अपमान के अलावा उसकी आत्महत्या का कारण क्या है?

2. जब तारा खुद को नुकसान पहुँचाने या आत्महत्या करने की कोशिश की, तो वह पुलिस स्टेशन के सामने क्यों किया और पुलिस ने उनको रोकने या बचाने की कोशिश क्यों नहीं किया ?

3. जब पूरे देश में 500 और 1000 रुपये का मसला था, तो पेट्रोल कहा से आया?

4. तारा की मोबाइल उनसे क्यों छीन लिया गया था?

5. जब कोई भी एक सार्वजनिक स्थान में मर जाता है, उनके शरीर को हटाने से पहले जगह चिह्नित किया जाता है। तारा से लिया गया था, क्यों वहां कोई निशान नहीं है?

6. जब पुलिस से इतने सारे वीडियो सबूत जारी की है, वे क्यों सिर्फ़ तारा की आत्महत्या करने की कोई रिकॉर्ड नहीं है? जब सीसीटीवी फुटेज के लिए पूछा, हमें बताया गया कि सीसीटीवी 27 अक्टूबर से काम नहीं कर रहा है। यदि यह मामला है, 29 अक्टूबर 2016 दीपावली का सम्मेलन वही हुआ था, जहां हजारों लोग इकट्ठा होते है। ऐसे एक प्रमुख स्थान में भी उस समय सीसीटीवी काम नही कर रहा था क्या ?

अब पुलिस ट्रांस कार्यकर्ताओं और सहयोगियों को परेशान कर रहे है जो चेन्नई में पुलिस आयुक्त के कार्यालय के पास कार्रवाई की मांग को लेकर धरना कर रहे थॆ। उनको अवैध रूप से नवंबर 10 तारीख को हिरासत में लिया गया।

पुलिस और तमिलनाडु सरकार ने इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। जब तक दोषी को दंडित किया जाता है, हम आंदोलन करते रहेङ्गे।

हमरी मांगे

1. तारा की मौत के दोषियों को एक उचित जांच के बाद सजा दिया जाना चहिये।

2. पुलिस सख्ती से ट्रांस लोगों को परेशान नहीं करने के लिए निर्देश दिया जाना चाहिए और किसी भी दोषी अधिकारी को कार्रवाई के दौरन निलंबित कर दिया जाना चाहिए और कार्रवाई के बाद दंडित किया जाना चहिये । हिज्राओ को दैनिक तौर पे जनता उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है और पुलिस को सुशीलता से उनका सहारा दॆना चहिये। ट्रांस लोगों की चिंताओं को खारिज करके उन्हें परेशान करने के बजाय इन कानून-व्यवस्था के मुद्दों को संबोधित करने की जरूरत है।

3. एक अत्याचार अधिनियम को बनाना चाहिये जो कि ट्रांस लोगों के खिलाफ अपराधों को खास सजा दे। नही तो इसको ‘ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के हक, 2014’ बिल मे शामिल किया जाना चाहिये, जो राज्य सभा मे तिरूचि शिवा द्वारा आगे रखा गया और वहा से पारित होके अब लोकसभा में है। इसमे आरक्षण और अन्य उत्कृष्ट प्रावधान। ‘ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के हक, 2016’ बिल जो भारत सरकार द्वारा लोकसभा में अभी आगे रखा गया है, वो हिज्रा और ट्रांस महिलाओं की अपराधीकरण करते है, जिनको आजीविका का आयोजन भीख माङ्गने के अलावा कुछ भी नही है। इस बिल को खत्म कर दिया जाना चाहिए और ‘ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के हक, 2014’ के लोकसभा द्वारा पारित किया जाना चहिये।

4. टी वी शॊ जैसे कि ज़ी तेलुगु द्वारा आयोजित ‘बत्तुकु जट्का बन्डी ‘ और टी वी 9 द्वारा आयोजित ‘ओपरेशन आनन्दी’ जो ट्रांसजेंडर और समलैंगिक लोगों के खिलाफ हिंसा और शोषण भड़काते है इन को दंडित किया जाना चाहिए।

5. रोजगार और आवास सुविधाओं को ट्रांस लोगों के लिए सरकार द्वारा प्रदान किया जाना चाहिए, उनके जीवन और आजीविका के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए। एक अकेला बेघर कोथी की लाश एक महीने पहले हैदराबाद में मिली और उसकी हत्या की जांच के नाम पर पुलिस हिजरा समुदाय को परेशान कर रही है। बैंगलोर में कल एक और बेघर हिज्रा मृत पायी गयी। हिज्रा और ट्रान्स्जेन्डर समुदाय प्रणालीगत और संरचनात्मक हिंसा से मर रहे है, नालसा के उच्चतम न्यायालय के फैसले के कार्यान्वयन के बिना। नालसा सुप्रीम कोर्ट के फैसले को तुरंत लागू करो!

6. सभी हिज्राओ की अपराधीकरण करने वाले अधिनियम जैसॆ आईटीपीए, भीख माङ्गने पे पबन्दी, सार्वजनिक उपद्रव एक्ट, सार्वजनिक अभद्रता एक्ट और धारा 377 को तुरंत रद्द किया जाना चाहिए ।

बहुत हो गया हिज्राओ की अपराधीकरण! बहुत हो गया हिंसा! पुलिस हिरासत में हिंसा बन्द करो !!!

सम्पर्क: बिट्टू, 8179542651 जगह: जंतर मंतर, दिल्ली दिनांक + समय: 14 नवंबर 6 PM