“जान देंगे पर पहाड़ नहीं देंगे”, “एटापल्ली तहसील की सभी जनविरोधी खदाने तुरंत रद्द करो” – सुरजागड़ पारंपरिक इलाखा गोटुल समिती

November 18, 2016

*गडचिरोली विनाश की और**...*

*गडचिरोली जिल्हे में वर्त्तमान में चल रहे या चालू करने के कोशिश वाली खदाने*
*: *सुरजागड *(*एटापल्ली तालुका*) - *१*. *लॉयड्स कंपनी *- *३४८*.*०९ हेक्टर
*, *देऊळगाव *(*आरमोरी तालुका*) - *२*. *तावाक्कल *- *५*.*४१ हे*., *३*. *मॉडर्न
मिनरल *- *१*.*६२ हे*, *४*. *कोटा मिनरल्स *- *२० हे*.*

*गडचिरोली जिल्हे में प्रस्तावित खदाने**:*

कोरची तालुका*: **झेंडेपार क्षेत्र* – १*. *अमोलकुमार अग्रवाल कंपनी *- *१२ हे
*, *२*. *निर्मलचंद कंपनी *- *२५*.*६२ हे*, *३*. *अनुज माईन एंड मिनरल्स *- *१२
हे*, *४*. *रमेश वाजुरकर कंपनी *- *८ हे*, *५*. *मनोजकुमार सरिया *- *४
हे *, **भर्रीटोला
क्षेत्र* *- *१*. *विनायक इंडस्ट्रीज *- *२१*.*३९ हे*, **मसेली क्षेत्र* – १
*. *अजंता मिनर ल्स *- *६५ हे*, *२*. *चमन मेटालिक्स प्रा*.*ली*. - *२०० हे*, *
३*. *सिधावाली इस्पात *- *१५० हे*, *४*. *सुरजागड स्टील एंड माईन्स *- *५० हे
*, *५*. *धारीवाल इन्फ्रास्ट्रक्चर *- *३५३*.*६० हे*, *६*. *टाटा स्टील *- *१३१
*.*१० हे*, (*पुरे लोह खनिज खदान*)*

एटापल्ली तालुका*: **सुरजागड* – १*. *गोपनी आयरन *- *१५३*.*०९ हे*, *
*दमकोंडवाही* *- *१*. *गोपनी आयरन *- *२९५ हे*, *२*. *जे*.*एस*.*डब्लू*. *
इस्पात *- *२०५० हे*, **बांडे* *- *१*. *सनफ्लाग आयरन*- *२३६*.*७५ हे*, *
*नागलमेटा* *- *१*. *ग्रेस इंडस्ट्रीज *- *१५६ हे*, **गुदंजुर* – १*. *आधुनिक
कोप*. *लिमि*. - *४४९*.*२८ हे*, **गुन्दुरवाहीमेटा* *- *१*. *सत्यनारायण
अग्रवाल – ५७१ हे*, **मल्लेर मेटा **- *१*. *कल्पना अग्रवाल – ४६३ हे*, *
*अद्रेलगुडा**- *१*. *सिधावाली इंडस्ट्रीज *- *३०७ हे*, **करमपल्ली* *-
*१*. *वीरांगना
स्टील *- *६३१*.*५५ हे*, **परहुर मेटा* *- *१*. *इस्पात इंडस्ट्रीज *- *४६३ हे
(पुरे लोह खनिज खदान)

अहेरी तालुका*: **देवलमारी* *- *१*. *वाय एंड एम् सीमेंट *- *२५२ हे*,
*२*. *गुजरात
सीमेंट *- *२७१ हे

इसके साथ साथ धानोरा*, *चमोर्शी*, *भामरागड इस तालुका में भी खदाने प्रस्तावित
होने की प्रक्रिया चल रही है*. *जिसमे हजारो हेक्टर वन भूमि और एनी भूमि नष्ट
की जाएगी*. *शेकडो गावो पर विस्थापन का खतरा और हजारो परिवारों को बेघर किया
जा सकता है*. *इसमे आदिवासियों के साथ साथ एनी समुदायों पर भी सीधा प्रभाव
गिरेगा*. *पर्यावर का नुकसान और भी गंभीर परिणामो को सामने लायेगा*.*

पिछले कही सालों से सरकार निजी कंपनियों द्वारा गडचिरोली के सुरजागड, आगरी-
मसेली, बांडे, दमकोंडवाही आदि जगहों पर लोह खनन चालू करने के प्रयास कर रही है
. जिसका स्थानिक जनता जोरदार विरोध कर रही है. लोगो को बहकाने की, उन्हें
खरीदने की हर एक कोशिश विफल होती देख विरोध करती जनता पर दमन किया जा रहा है. लोग
समझ के संगठित न हो पाए इसीलिए दलाल जनप्रतिनिधियों द्वारा लोगो को गुमराह
किया जा रहा है.

सुरजागड़ में जनविरोधी खनन प्रयासों और इस हिंसक विकास प्रक्रिया का पुरजोर
विरोध कर रहे सुरजागड़ पारंपरिक इलाखा गोटुल समिती के और से क्रांतिवीर बिरसा
मुंडा इनके जयंती दिवस पर पत्रकार परिषद् का आयोजन किया गया था. खनन को जनता
के विरोध को उन्होंने इस पत्रकार परिषद् में उजागर किया.

विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन सुरजागड़ इलाखा के जनता के संघर्ष में उनके
साथ मजबूती से खड़ा है.

हम जनविरोधी इन्ह खनन परियोजनायों को बंद करने की और किये गए सभी करारों को
रद्द करने की बात करते है. और स्थानिक जनता के साथ-साथ गडचिरोली जिल्हे की जनता
, जन संगठनो, राजनैतिक दल, बुध्दिजीवीयों, शिक्षक, विद्यार्थियों, युवायों से
अपील करते है की वे इन्ह खनन परियोजनायों की वास्तविकता समझें, रोजगार के झूठे
वादों को नकार कर, इन्ह खनन परियोजनायों के पीछे से होने वाली इस क्षेत्र के
संसाधनों की लुट को जल्द हि समझ कर इसके विरोध में एक सामूहिक संघर्ष को मजबूत
बनाये.

*" **यह साफ है की विस्थापन सिर्फ आदिवासियों का मसाला नहीं है**.. **जल**-*
*जंगल**-**जमीन से सिर्फ आदिवासियों को ही नहीं उजाड़ा जा रहा है**... **बल्कि
आदिवासियों के साथ**-**साथ बाकि सभी मेहनतकश समुदायों को रोजी रोटी से उजाड़ा
जा रहा है**.. **जिंदगी से उजाड़ा जा रहा है**..."*

   -

   *विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन*



सुरजागड़ पारंपरिक इलाखा गोटुल समिती द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति का हिंदी
अनुवाद आगे दिया है.


*"**एटापल्ली तहसील की सभी जनविरोधी खदाने तुरंत रद्द करो**" - **सुरजागड़
पारंपरिक इलाखा गोटुल समिती*


गडचिरोली, १४ नोव्हेंबर २०१६: रोजगार और विकास के नाम पर सुरजागड़ इलाखे के
हमारे देव, पवित्र डोंगर-पहाड़ और वनों को नष्ट करने वाले, हमारी आदिम संस्कृति
को ख़त्म करने के प्रयासों, और हमें विस्थापित करने पे तुले हुए सभी खदानों को
गैर कानूनन घोषित कर उन्हें तुरंत रद्द किया जाये ये स्पष्ट भूमिका ७० गावों
के पारंपरिक सुरजागड़ क्षेत्र की इलाखा गोटुल समितीने प्रत्रकार परिषद् में
जाहिर किया.


अधिक जानकारी देते हुए सुरजागड़ पारंपरिक इलाखा गोटुल समिति के प्रतिनिधि सैनु
गोटा ने कहा की, एटापल्ली के सुरजागड इलाखे में सुरजागड, बांडे, दमकोंडवाही,
मोहंदी, गुडजुर क्षेत्र के साथ-साथ अन्य ११ जगह खदाने प्रस्तावित की गयी
है. वर्त्तमान
में सुरजागड में लॉयड्स मेटल्स एंड इंजीनियर्स इस कंपनी को लोह खदान का आवंटन
किया गया है. इन्ह सभी खनन क्षेत्रो को प्रस्तावित करते वक्त या मंजूरी देते
हुए वन संवर्धन कानून १९८०, पर्यावरण अधिनियम १९८६, पेसा कानून १९९६, महाराष्ट्र
ग्रामपंचायत अधिनियम १९५९ के प्रकरण ३ अ के कलम ५४, अनुसूचित जमती एवं अन्य
पारंपरिक वन निवासी (वन हक्क मान्यता) अधिनियम २००६, खान एवं खनन अधिनियम और
अन्य कानूनन प्रावधानों का उलंघन खुद प्रशसन और सरकार द्वारा किया जा रहा है. जो
इन्ह खदानों को गैरकानूनन बना देती है. ये खदाने जहा प्रस्तावित है या जहा
मंजूरी दी गयी है उन्ह जगहों पर हमारे ठाकुरदेव, तल्लोरमुत्ते, माराई
सेडो, बंडापेन
इन्ह देवतायो के पवित्र पहाड़ और जंगल है. जो की यहा के स्थानिक आदिवासी एवं
अन्य समुदायों की मुख्य सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासते है. इन्ह सभी
प्रस्तावित खदानों से लगभग १५,९४६ एकर और लगभग ४० हजार एकर जंगल-जमीन खदान
पूरक कामो के लिए नष्ट किया जायेगा. इससे सिर्फ सुरजागड़ क्षेत्र ही नहीं बल्कि
एटापल्ली, भामरागड और अन्य तहसील के ग्रामसभयो के लोगो का वनों पर आधारित
शाश्वत रोजगार प्रभावित और ख़तम हो जायेगा. इन्ही कारणों से प्रस्तावित एवं
आवंटित खदानों को ७० गावो के पारंपरिक सुरजागड़ इलाखा गोटुल समिति का पुरजोर
विरोध है. और इसीलिए ग्रामसभयो ने कानूनन ग्रामसभा प्रस्ताव पारित कर एवं
निवेदनों द्वारा खदानों को रद्द करने की पक्की भूमिका ली है ये बात उन्होंने
पत्रकारों के समक्ष रखी.

सुरजागड़ क्षेत्र की कल्पना आलाम और अन्य उपस्थित जनसमुदाय प्रतिनिधियों ने
आरोप लगाया की, विकास और रोजगार के जुमलो द्वारा लोगो की सहानभूति पाकर
राजनैतिक व्यक्ति एवं प्रशासन के अधिकारी सिर्फ दलाली कमाने हेतू पूंजीपतियों
को गडचिरोली के बहुमूल्य संसाधन बेच रहे है. जनता ने ये मांग रखी की अगर सरकार
को स्थानिक युवायों को अगर सचमे रोजगार मुहैया करना है तो गडचिरोली जिल्हे में
रिक्त सभी पदों को भरकर रोजगार के अवसर खोले जाये.

उपस्थित प्रनिधियो ने सरकार को इशारा दिया की, आदिवासी जनता के पूजा
स्थानों-पवित्र
पहाड़ो और शाश्वत रोजगार को बचाने हेतु खनन विरोधी ग्रामसभा प्रस्तावों की तरफ
ध्यान देकर तुरंत सभी खदानों के आवंटन रद्द किये जाये. अगर सरकार ऐसा नहीं
कराती है तो हम अपने जंगल को, वनों से मिलने वाले रोजगार को, हमारी संस्कृति-हमारे
देव और पूजा स्थल बचाने के लिए ऐतिहासिक आन्दोलन खड़ा किया जायेगा ये इशारा
स्पष्ट करते हुए सुरजागड़ इलाखा समिति ने "जान देंगे पर पहाड़ नहीं देंगे" ये आर
पार की लढाई का ऐलान किया.

इस पत्रकार परिषद् में खदान के विरोध में उतरे सुरजागड़ इलाखा के जनता और
पारंपरिक गोटुल समिति के समर्थन में गडचिरोली जिल्हे के अलग अलग क्षत्रों ने
भी अपनी बात रखी. एटापल्ली तहसिल के तोडसा पट्टी के ४० ग्रामसभायो के तरफ से
नंदू मट्टामी, वेनहारा (कसनसुर) क्षेत्र से ६८ ग्रामसभायो के तरफ से कोत्तुराम
पोटावी, बेज्जुर (भामरागड) पट्टी के १२६ ग्रामसभायो के तरफ से अड़. लालसु नरोटी
, झाडापापड़ा इलाखे की ४० ग्रामसभयो के तरफ से बावसू पावे, खुटगाव इलाखे की ६५
ग्रामसभयो के तरफ से बाजीराव उसेंडी, के साथ साथ कोरची क्षेत्र (९० ग्रामसभाये
) और तिपागड़ क्षेत्र (३० ग्रामसभाये) के प्रतिनिधियों ने प्रस्तावित एवं मंजूर
सभी खनन प्रक्रिया का विरोध किया और सुरजागड़ के खनन विरोधी संघर्ष को अपना
समर्थन ज्यारी करते हुए सुरजागड़ क्षेत्र के स्थानिक जनता के संघर्ष में पूरा
सहयोग देने का ऐलान किया. सुरजागड़ क्षेत्र के साथ साथ अन्य क्षेत्रों से भी
ग्रामसभा प्रस्ताव और निवेदन भेजे जायेंगे.


- सुरजागड़ पारंपरिक इलाखा गोटुल समिती

 

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