Uttar Pradesh – Fact-finding reports, statements on communal riots in Faizabad

November 9, 2012

Report submitted by independent human right activists after their visit to Faizabad

फैजाबाद में दुर्गा पूजा, 2012, के अवसर पर हुई हिंसा पर एक रपट व ऐसी घटनाओं की पुनरावृात्ति न हो इस हेतु सुझाव (जांच दल ने प्रभावित क्षेत्र का 3 नवम्बर, 2012, को दौरा किया।)

1. हिंसा एकतरफा और प्रयोजित प्रतीत होती है।
2. केन्द्रीय दुर्गा पूजा समिति की संदिग्ध भूमिका। उनके निमंत्रण पत्र पर 3 नं. बिन्दु में लिखा है कि जुलूस में अधिक संख्या में लोग आएं लेकिन महिलाएं व बच्चे न आएं। क्या उन्हें होने वाली हिंसा का अंदाजा था?
3. हिंसा का कारण बताया जा रहा है किसी नवयुवक द्वारा किसी लड़की को छेड़ना। वह नवयुवक कौन था, कहां है? जुलूस के साथ मौजूद सुरक्षा बल ने क्या उसे नहीं देखा? इस घटना पर कोई प्राथमिकी क्यों नहीं दर्ज हुई?
4. दुकानें फैजाबाद के केन्द्र में 400 मीटर लम्बाई व 60 मीटर चैड़ाई क्षेत्र में ही जली हैं। पुलिस घटनास्थल पर मौजूद थी। पुलिस ने दंगाइयों को रोकने के लिए कोई कार्यवाही क्यों नहीं की?
5. कफ्र्यू के दौरान दिन में साकेत स्टेशनरी में आग लगना अत्यंत गम्भीर घटना है। प्रशासन का दावा है कि आग शार्ट सर्किट होने से लगी जबकि बताया जा रहा है कि आग लगने के समय बिजली आ ही नहीं रही थी। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक व जिलाधिकारी की भूमिका की जांच आवश्यक प्रतीत होती है। इनको और अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व व्यवस्था) हटाया जाना स्वागतयोग्य है।

सुझावः
1. आने वाले दिनों में कई हिन्दु-मुस्लिम पर्वों को देखते हुए 6 दिसम्बर तक प्रशासन सजग रहे और किसी भी अप्रिय घटना की आशंका पर प्रभावी हस्तक्षेप करे।
2. धार्मिक भीड़ के नाम पर संगठित साम्प्रदायिक समूहों से सावधान रहा जाए।
3. पटाखों व शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
4. आतिशबाजी का यदि कोई समान बिकना भी है तो वह शहर के बाहर बिके।
5. दीपावली बाजार घंटाघर के बजाए शहर के बाहर लगवाया जाए।
6. धर्मनिर्पेक्ष युवाओं की सद्भाव समिति बनाई जाए चूंकि युवा ही हिंसा
में आगे रहता है। इसके अलावा विभिन्न धर्म के धर्माचार्यों की भी सद्भाव समिति बने।
7. दीपावली/मोहर्रम में लोग व्यापार कर सकें इसके लिए जिनकी दुकानें जली हैं उन्हें पूरा मुआवजा पर्व के पहले मिल जाए।

युगल किशोर शरण शास्त्री, 9451730269, खालिक अहमद खान, 9415077171, विनय श्रीवास्तव, शाह आलम, गुफरान सिद्दीकी, एस.एम. नसीम, 9839123786, ओंकार सिंह, 9839324885, एडवोकेट मोहम्मद शोएब, 9415012666, मोहम्मद सुलेमान, जैद फारुकी, राजीव यादव, 9452800752, आफताब आलम और संदीप पाण्डेय, 05222347365

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Failure of Chief Minister to visit the riot-affected is shameful
Mulayam’s and Akhilesh’s attitude is more dangerous than Modi’s
The SP government is breathing life into a once-dead BJP
– Forum for the Release of Innocent Muslims imprisoned in the name of Terrorism

मुख्यमंत्री का दंगा पीडितों के बीच न जाना षर्मनाक- रिहाई मंच
मुलायम और अखिलेष का रवैया मोदी से भी खतरनाक-रिहाई मंच
दम तोड चुकी भाजपा को जीवित करने में लगी है सपा सरकार

लखनऊ 1 नवम्बर/
रिहाई मंच ने फैजाबाद में हुये दंगे के हफ्ते भर बाद भी मुख्यमंत्री अखिलेष यादव के वहां न पहंुचने की कड़ी आलोचना करते हुए इसे मुख्यमंत्री का गैर जिम्मेदार रवैया बताया है।

रिहाई मंच की तरफ से दंगा प्रभावित इलाकों से दूसरे चरण की छानबीन करने के बाद जारी विज्ञप्ति में राजीव यादव, लालचंद, आलोक, ऋशि कुमार सिंह ने कहा कि प्रभावित लोगों के बीच सरकार की तरफ से मुख्यमंत्री या किसी वरिश्ठ मंत्री के न जाने से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के प्रति सरकार के प्रतिबद्धता पर सवालिया निषान लगता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और दूसरे वरिश्ठ मंत्री सिर्फ लखनउ में बैठ कर दोशियों को सजा देने की बात कर रहे हैं। जबकि स्थानीय स्तर पर डरे सहमे लोगों में विष्वास बहाली की कोई कोषिष सरकार की तरफ से नहीं की जा रही है। उल्टे भदरसा में हिंसा के षिकार मुसलमानों पर ही फर्जी मुकदमे लाद कर उन्हें दंगाई साबित करने की कोषिष की जा रही है जबकि असली दोशियों को खुला छोड दिया गया है।

जांच दल ने दुर्गा पूजा समिति के नेता और सपा से जुडे मनोज जायसवाल की भूमिका पर सवाल उठाते हुये कहा कि प्रदेष सरकार में दंगाईयों से निपटने की इच्छा षक्ति नहीं है। क्योंकि खुद समाजवादी पार्टी से जुडे हिंदुत्ववादी तत्व ही इस दंगे के मुख्य शडयंत्रकारी हैं। इसीलिये मुख्यमंत्री लखनउ से तो दोशियों को सजा दिलवाने की बात कर रहे हैं लेकिन फैजाबाद जाने की हिम्मत नहीं दिखा पा रहे हैं क्योंकि वहां दंगा पीडित मुसलमान उनसे उन्हीं की पार्टी के नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाएंगे। मानवाधिकार नेताओं ने इन दंगों को सपा द्वारा कमजोर पड चुकी भाजपा को जिंदा करने की कवायद करार देते हुये कहा कि सपा लोकसभा चुनाव से पहले साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण कराने पर तुली है।

राजीव यादव और लालचंद ने कहा कि सपा सरकार को अमरीश चंद्र षर्मा से ज्यादा बेहतर पुलिस अधिकारी प्रदेष का डीजीपी बनाने के लिये नहीं मिला। इससे भी सरकार के मुस्लिम विरोधी रवैये को समझा जा सकता है। क्योंकि मौजूदा डीजीपी पर 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद कानपुर में हिंदुत्ववादी तत्वों को प्रश्रय देने का आरोप है। तब वह वहां एसएसपी के पद पर तैनात थे। जिस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनउ बेंच के तत्कालीन न्यायमूर्ति आईएस माथुर के नेतृत्व में जांच आयोग गठित किया गया गया था जिसने 1998 में ही अपनी रिर्पोट सरकार को सौंप दी थी। जांच दल के सदस्यों ने कहा कि यदि सपा सच मुच धर्मनिरपेक्ष होती तो माथूर आयोग की रिर्पोट को सार्वजनिक करते हुये ए सी षर्मा के खिलाफ दंडात्मक कार्यवायी करती। लेकिन उसने उल्टे उन्हें डीजीपी बना दिया और आठ महीने में ही 9 दंगे हो गये।

मानवाधिकार नेताओं ने अखिलेष सरकार को गुजरात की मोदी सरकार से भी ज्यादा मुस्लिम विरोधी करार देते हुये कहा कि मोदी ने तो 2002 में चुनाव जीतने के लिये मुसलमानों के खिलाफ हिंसा करवायी थी लेकिन सपा ने तो मुसलमानों के सहयोग से ही चुनाव जीतने के बावजूद सत्ता में आते ही मुस्लिम विरोधी दंगे कराना षुरू कर दिया। नेताओं ने कहा कि घोशित तौर पर मुस्लिम विरोधी भाजपा सरकार के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी देर से ही सही लेकिन गुजरात के मुस्लिम पीडितों से मिलने गये थे। लेकिन मुसलमानों के हमदर्द होने का दावा करने वाले मुलायम सिंह या उनके मुख्यमंत्री बेटे ने
फैजाबाद सहित उनकी सरकार में हुये किसी भी दंगे में अब तक पीडितों से मिलने का कश्ट नहीं उठाया है।

रिहाई मंच के नेताओं ने मुख्यमंत्री अखिलेष यादव के इस बयान को भी गुमराह करने वाला करार दिया जिसमें उन्होंने दंगों को उनकी सरकार को बदनाम करने की विरोधियों की साजिष बताया था। मानवाधिकार नेताओं ने कहा कि प्रतापगढ के अस्थान गांव में 45 मुसलमानों के घर जलाने की घटना के पीछे तो सपा सरकार में मंत्री रघुराज प्रताप सिंह के समर्थकों और सपा सांसद षैलेंद्र कुमार की भूमिका सामने आयी है। अगर उनके मंत्री और सांसद ही सरकार को बदनाम करने के लिये दंगा करा रहे हैं तो यह उनके नेतृत्व क्षमता पर ही सवाल उठाता है।

जांच दल के सदस्यों ने कहा कि आने वाले दिनों में कई प्रतिश्ठित मानवाधिकार नेता, पत्रकार और बुद्धिजीवियों का एक दल भी फैजाबाद दंगा प्रभावित लोगों से मिलने जाएगा और इस पूरे प्रकरण में सपा सरकार की भूमिका पर जनता के सामने रिपोर्ट लाएगा।

द्वारा जारी-
राजीव यादव
09452800752, 09415254919

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The Faizabad Riots were pre-planned
The SP Government is a Government of Rioteers
Investigative Team reaches Faizabad to investigate the riots
– Forum for the Release of Innocent Muslims imprisoned in the name of Terrorism

फैजाबाद दंगा पूर्वनियोजित था- रिहाई मंच
सपा सरकार दंगाइयों की सरकार- रिहाई मंच
फैजाबाद दंगे की जांच के लिए जांच दल पहुंचा फैजाबाद

फैजाबाद 29 अक्टूबर 2012/
फैजाबाद में हुए दंगों की जांच के लिए रिहाई मंच के एक जांच दल ने 28 अक्टूबर को फैजाबाद के कफर््यू ग्रस्त इलाकों का दौरा किया। जांच दल ने पाया कि दंगा पूर्वनियोजित था, जिसकी तस्दीक यह
बात करती है कि बहुत कम समय में फैजाबाद के कई स्थानों पर टकराव, व तनाव का होना है। 21-22 सितंबर की रात देवकाली मंदिर की मूर्ती के चोरी होने और 23 अक्टूबर को उसके मिलने का प्रकरण और उस पर हुई सांप्रदयिक राजनीति इस दंगे की प्रमुख वजहों में से एक थी। हिन्दुत्वादी समूहों के अफवाह तंत्र ने आमजनमानस के भीतर इस बात को भड़काया कि देवकाली की प्रतिमा को मुसलमानों ने चोरी किया। केंद्रिय दुर्गा पूजा समिति फैजाबाद ने भी कहा था कि वो पूजा पांडालों पर विरोध स्वरुप पांडालों को कुछ घंटों तक दर्शन के लिए बंद रखा जाएगा। यहां गौरतलब है कि केंद्रिय दुर्गा पूजा समिति फैजाबाद के अध्यक्ष मनोज जायसवाल समाजवादी पार्टी के भी नेता हैं। पर ऐन वक्त 23 अक्टूबर को मूर्तियों के बरामद होने के बाद हिन्दुत्वादी शक्तियों के मंसूबे पस्त हुए। क्योंकि मूर्ति की चोरी में पकड़े गए लोग हिंदू निकले ऐसे में ऐन वक्त में पहले से प्रायोजित दंगों के लिए अफवाहों का बाजार गर्म करके जगह-जगह पथराव करके दंगे की शुरुआत की गई। पहले से तैयार भीड़ ने प्रायोजित तरीके से सैकड़ो साल पुरानी मस्जिद हसन रजा खां
पर हमला बोला ओर उसके आस-पास की तकरीबन तीन दर्जन से ज्यादा दुकानों में लूटपाट व आगजनी की और पूरे फैजाबाद को दंगे की आग में झोक दिया।

पुलिस की निस्क्रियता का यह आलम रहा कि चैक इलाके की साकेत स्टेशनरी मार्ट को दंगे के दूसरे दिन 25 अक्टूबर को पुलिस की मौजूदगी में फूंका गया। बाद में जब दुकान के मालिक खलीक खां ने प्रशासन से एफआईआर दर्ज करने की मांग की तो यह कहकर पुलिस ने हिला हवाली की कि बिजली की शार्ट शर्किट की वजह से आग लगी।

जांच दल के आलोक अग्निहोत्री, राजीव यादव और सुब्रत गुप्ता ने कहा कि प्रथम दृष्ट्या प्रयोजित दंगों में अफवाह तंत्र के सक्रिय होने और फैजाबाद प्रशासन की निष्क्रियता के चलते दंगाइयों का मनोबल बढ़ा और कुछ घंटों में उन्होंने प्रायोजित तरीके से आगजनी और लूट-पाट की। जांच दल के सामने यह तथ्य आये, कि दंगे को दशहरा-ईद-दीपावली के ऐन वक्त कराने के पीछे दंगाइयों की यह मानसिकता भी सामने आई की ज्यादा से ज्यादा लूट और आगजनी करके मुस्लिम समुदाय को नुकसान पहुंचाना।

रिहाई मंच द्वारा फैजाबाद दंगों के तथ्य संकलन का काम जारी है। मंच ने प्रथम दृष्ट्या तथ्यों के आधार पर यह वक्तव्य जारी करते हुए देश के विभिन्न मानवाधिकार सामाजिक व राजनीतिक संगठनों से अपील की है कि वो फैजाबाद के उक्त घटनाक्रम का संज्ञान लेते हुए अपनी जनपक्षीय प्रतिबद्धताओं व सरोकारों के साथ साम्प्रदायिक ताकतों का प्रतिरोध करें।

द्वारा जारी-
राजीव यादव
09452800752, 09415254919

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आतंकवाद के नाम पर कैद निर्दोषों का रिहाई मंच

[Summary – The recent communal attacks on Muslim-owned shops in Faizabad were state-sponsored, a recent meeting of Rihai Munch held. Rihai Manch demands an investigation into the role of IB in these riot and the immediate removal of DGP A C Sharma. In the 8th month of SP government, this is the ninth large scale attack against Muslims. In the guise of fighting terrorism, innocent Muslims are paraded with RDX to launch a broad attack against Muslims. The communal nature of the state machinery is underlined by the presence of DGP A C Sharma, who has been indicted for his role in the killing of Muslims in communal riot in Kanpur after the destruction of Babri Masjid. The SP government professes to be a protector of Muslims but has little to prevent attacks against Muslims. – Ed]
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फैजाबाद में दंगा राज्य सरकार के प्रोत्साहन से हुआ- रिहाई मंच
दंगों में आईबी की भूमिका की जांच हो- रिहाई मंच
एसीशर्मा को तत्काल हटाया जाय- रिहाई मंच

लखनऊ 25 अक्अूबर 2012/ रिहाई मंच फैजाबाद में दशहरा की रात मुसलमानों के
दुकानों की आगजनी को सपा सरकार द्वारा मुसलमानों को सुरक्षा न दे पाने का
ताजा उदाहरण बताते हुए सपा सरकार पर साम्प्रदायिक ताकतों को संरक्षण देने
का आरोप लगाया है। मंच ने डीजीपी एसी शर्मा को तत्काल हटाने की मांग की
है।

लाटूश रोड स्थित रिहाई मंच के दफ्तर पर फैजाबाद के हालात को लेकर हुई
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि आठ महीने की सपा सरकार में यह नवां बड़ा
मुस्लिम विरोधी दंगा है। जिससे साबित होता है कि सरकारी मशीनरी पूरी तरह
साम्प्रदायिक हो चुकी है। फैजाबाद में मुसलमानों पर सांप्रदायिक हमले की
आशंका तीन-चार महीने से बनी हुई थी। लेकिन इसे रोकने के लिए सही कदम नहीं
उठाए गए। वक्ताओं ने कहा कि जिस तरह फैजाबाद के कई इलाकों जैसे रुदौली,
भदरसा, शायगंज, फैजाबाद चैक, घोसियाना में पुलिस की उपस्थिति में जय श्री
राम, मंदिर वहीं बनाएंगे, यूपी अब गुजरात बनेगा-फैजाबाद शुरुआत करेगा के
नारे लगाते हुए एक साथ मुसलमानों की दुकानों को चिन्हित करके जलाया। यह
सामान्य दंगे का नहीं बल्कि मुसलमानों पर सरकारी मशीनरी के सहयोग से किया
गया हमला साबित होता है।

वक्ताओं ने कहा कि आतंकवाद के नाम पर निर्दोष मुसलमानों को आरडीएक्स के
साथ दिखाकर आतंकी बताकर फसाने वाला खुफिया तंत्र आखिर हिन्दुत्वादी
शक्तियों ़द्वारा मुसलमानों के खिलाफ की जा रही साजिश को क्यों नहीं
उजागर कर पाया। वक्ताओं ने इस घटना पर आईबी, एलआईयू द्वारा प्रशासन को दी
गई रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की है। वक्ताओं ने संभावना जाहिर
की कि इस दंगे में खुफिया एजेंसी की भूमिका संदिग्ध है और इसकी जांच होनी
चाहिए।

बैठक में सपा सरकार पर हिन्दुत्वादी ताकतों को संरक्षण देने का आरोप
लगाते हुए कहा कि यह आश्चर्य की बात है कि मुसलमानों के हमदर्द होने का
दावा करने वाली सपा सरकार में डीजीपी एसी शर्मा जैसे सांप्रदायिक इतिहास
रखने वाले अफसर हैं। जिनपर बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद कानपुर में हुए
सांप्रदायिक दंगों में निभाई गई मुस्लिम विरोधी भूमिका के चलते इलाहाबाद
हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच के तत्कालीन जज आईएस माथुर के अधीन जांच आयोग गठित
किया गया। जिसकी रिपोर्ट 1998 से ही सरकार के पास पड़ी है। लेकिन सपा
सरकार उस रिपोर्ट को जारी करने और एसी शर्मा पर कानपुर में हुए दंगे में
मारे गए बेकसूर लोगों की हत्या का मुकदमा चलाने के बजाय उन्हें डीजीपी
बनाकर पुरस्कृत किया है। जिससे सपा सरकार की सांप्रदायिक नियत उजागर होती
है।

बैठक में एडवोकेट मोहम्मद शुऐब, अंकित चैधरी, राजीव यादव, जैद अहमद
फारुकी, अनुज शुक्ला मोहम्मद आफाक इत्यादि उपस्थित रहे।

द्वारा जारी-
राजीव यादव
आतंकवाद के नाम पर कैद निर्दोषों का रिहाई मंच
09452800752, 09415012666, 09415254919

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Statement from All India Secular Forum

We condemn the attack on Mosque, the office of Aapki Takat and Shops of Muslims in Faizabad

On 24 October 2012, when the immersion procession of Durga was going on, a girl was molested by few miscreants. Making this as a pretext few people started stone throwing in the nearby areas. A rumor also spread in Faizabad that Muslims are doing the stone throwing. The mob went on to burn nearly 25 shops of Muslim traders. They also rampaged the office of bilingual (Urdu and Hindi) paper Aap Ki Takat. This paper is continuously giving the message of Peace and calling for Hindu-Muslim unity. They also rampaged the mosque.

According to local activist Yugal Kishore Sharan Shastri, this was a pre-planned attack. The editor of the paper Mehdi Manjar feels, this is an attempt to silence the voice of Peace. The police took long time to reach the spot and did not intervene effectively. Similarly the fire brigade also took four hours to reach, by which time the shops were totally destroyed.

Faizabad, neighboring Ayodhya, is a symbol of Peace. The act of communal forces in targeting the shops of Muslims, the mosque and the office of Aap ki Takat, is highly condemnable. We appeal to the local and state administration to bring in peace and to rehabilitate the violence victims on urgent basis. The owners of shops and the office of paper, Aap ki Takat, must be totally compensated for immediately. Strict action is needed against the police officials for neglect of their duty and also against the fire brigade for such a lapse on their part. The guilty must be punished with the due process of law.

Asghar Ali Engineer, L.S. Hardenia, Ram Puniyani, Irfan Engineer Mohammad Arif