Justice-loving people of SIngrauli demand the release of farmers’ leader Dr. Sunilam

November 1, 2012

Following is a report of a protest meeting organized by Lokavidya Ashram, Singrauli, MP to demand the release of Dr. Sunilam. A decision was also taken to take out a march in protest of the court’s decision which makes mockery of the martyrdom of farmers in the shooting at Multai.
-Ed

किसान नेता डॉक्टर सुनीलम की रिहाई की मांग को लेकर सिंगरौली की न्यायपसंद जनता लामबंद
मुलताई गोलीकांड मुकदमे में हुवे अन्याय के खिलाफ पैदल मार्च का आयोजन

मुलताई गोलीकांड मामले में कोर्ट द्वारा दिए गए अन्यायपूर्ण फैसले और किसान नेता और पूर्व विधायक डा. सुनीलम को जबरन फ़साये जाने के खिलाफ शिवाजी काम्प्लेक्स विन्ध्यनगर में एक बैठक का आयोजन किया गया जिसमे आगे की कार्य योजना तय की गई. मुलताई में पुलिस द्वारा किये गए इस बर्बर गोलीकांड में शहीद हुए किसानों की शहादत का भद्दा मजाक बनाने वाले कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ एक बड़ी मुहीम छेड़ने का निर्णय इस बैठक में लिया गया. प्रस्ताव यह आया कि २ नवम्बर २०१२ को दिन में १ बजे से वैढ़न स्थित कचहरी से मांजन मोड़ तक पैदल मार्च किया जाय और जिला कलक्टर के माध्यम से राज्यपाल को संबोधित अपनी मांगो का एक ज्ञापन सौपा जाय.

बताते चले कि ११ जनवरी १९९८ को तत्कालीन राज्य सरकार के आदेश पर पुलिस द्वारा यह बर्बर गोलीकांड तब किया गया जब कि मुलताई के किसान ओला और अतिवृष्टि के कारण बर्बाद हुई सोयाबीन की फसल का मुआवजा मांगने इकठ्ठा हुए थे. ज्ञात हो कि मध्य प्रदेश में राज्य सरकार ने १९८५ से ही फसल बीमा योजना की जिम्मेदारी ले रखी है, और राज्य का तत्कालीन राजस्व रिकार्ड यह बताता है कि मुलताई गोलीकांड के समय राज्य सरकार के पास इस मद में कूल ५८६ करोड़ रूपये जमा थे. फिर भी, किसानो को उनका अधिकार्गत राहत देने के बजाय शासन ने उन्हें गोली मारना उचित समझा, लिहाजा २४ किसानो को अपनी जान गवानी पड़ी और ८० किसान घायल हुए. डा. सुनीलम के नेत्रित्व में संगठित इस अराजनैतिक किसान आन्दोलन में क्षेत्रीय ८००० किसान पहले दिन से ही शांतिपूर्ण तरीके से अपना आन्दोलन चला रहे थे और पुलिस ने बिना किसी उकसावे के उनपर गोलिया चलाई.

इस अत्यंत ही बर्बरता पूर्ण करवाई के बाद जब विभिन्न जन संगठनो ने जांच का दबाव बनाया तब सरकार ने हत्यारी पुलिस को ही विवेचना का जिम्मा दे दिया और पीड़ितों को अभियुक्त बना दिया गया. न्यायालय द्वारा दिया गया फैसला घोर आपत्तिजनक है और साथ ही इस बात का प्रमाण है कि अब शासन, प्रशासन और न्यायपालिका की मिलीभगत से किसान, आदिवासी, छोटे दुकानदार, मछुवारे, कारीगर और महिलाएं और ऐसे ही उन सभी समाजो पर जुल्म ढाना ही अब “लोकतंत्र” का नया अर्थ है जो, सरकारों पर न्यूनतम निर्भरता के साथ, अपनी विद्या के बल पर अपनी आजीविका चलाते हैं. सरकार की व्यवस्थाओं द्वारा सबसे ज्यादा शोषित इन सभी समाजो के लोग सिंगरौली में एकजुटता के साथ मुलताई की शहादत का मखौल उडाये जाने की तीव्र भर्त्सना करते हैं और मुलताई के किसान समाज के साथ साथ देश भर के उन सभी संघर्षों के पक्ष में निम्न मांग करते हैं जो सरकारी लूट के खिलाफ चल रहे हैं :

१. किसान नेता और पूर्व विधायक सुनीलम की तत्काल रिहाई,
२. तत्कालीन जिला प्रशासन को अविलम्ब बर्खास्त कर उन सभी पर ह्त्या का मुकदमा चलाया जाये,
३. न्यायालय के अन्दर गैरजिम्मेदाराना सुनवाई और निर्णय के दोषी अधिकारियों और न्यायाधीशों की उच्चतम न्यायालय द्वारा जाँच कराई जाये.

बैठक में अवधेश, अजय, लक्ष्मीचंद दुबे, रवि शेखर, एकता, श्याम किशोर जायसवाल, शिवम्, रामसुभग, हीरालाल, वेदप्रकाश, मंजू जी, मनु, अरविन्द आदि उपस्थित थे.

द्वारा जारी,
अवधेश/लक्ष्मीचंद दुबे,
लोकविद्या आश्रम, सिंगरौली मध्य प्रदेश
08225935420/599
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