Singrauli, MP: Lok Sangharsh Yatra, arrest of Sanjay Namdev and other updates

January 3, 2013

The following are continuing updates from the Lok Sangharsh Yatra going on in Singrauli, MP. Please read in reverse order starting with a briefing about the arrest of union activist Sanjay Namdev under false charges on the day before a scheduled cycle yatra. The yatra is intended to draw attention to corporate misdeeds and state repression in the area.
– Editors

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PRESS RELEASE:

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DAY FIVE
दिनांकः 30.12.12
मात्र 100 लीटर पानी प्रतिदिन में जिन्दा रहने को विवश हैं विस्थापित परिवार
कामरेड संजय नामदेव रिहा, जेल से निकल कर सीधे यात्रा में शामिल

प्रस्तुत है लोक संघर्ष यात्रा के पाचॅवे दिन का संक्षेप।

मंदिर निर्माण और गौ रक्षा की दुहाई देने वाली मध्य प्रदेश की भगवा सरकार का असल चेहरा विस्थापितों की बस्ती में दिखता है जो भारत के नये मन्दिरों के बतौर प्रतिष्ठित औद्योगिक केन्द्रों की स्थापना के मार्फत उजाड़े गये हंै। खेतिहरों को उजाड़कर मवेशियों को भुखे मरने के लिए मजबुर करना और उनके पुजा स्थलों पर बुलडोजर चलाना यह साबित करता है कि बिरला अम्बानी की चाटुकारिता में लगी इस भगवा सरकार का मुल चेहरा स्याह है।

इस बीच, यात्रा को रोकने की हरसंभव कोशिश करने वाली पुलिस को बड़ा झटका लगा जब संजय नामदेव को विधिक सहायता देने में लगी टीम को संजय को जेल से निकलने में सफलता मिल गयी। जेल से निकलते ही कामरेड संजय सीधे मझगवा पहुंचे और यात्रा में शामिल हो गये।

लोक संघर्ष यात्रा अपने पाॅचवे दिन मझगवा में बनी विस्थापित बस्ती में पहुॅची जो आदित्य बिरला समुह के एल्युमिनियम और पावर प्लान्ट लगने से उजाड़े गये हैं। यात्रा के पहॅुचते ही मोहन भाई के घर पर विस्थापित परिवारों का हुजुम इकट्ठा हो गया और हवाई यात्राओं अथवा चलती गाडि़यो मे बैठकर दिखने वाली खुबसुरत कालोनी की हकीकत पता चलते दो मिनट का भी समय नही लगा। कई कई एकड़ में किसानी करके न केवल अपनी आजीविका बल्कि भुमिहीनो को भी साल भर का रोजगार देते हुए और बाजारों के मार्फत शहरों तक अनाज पहुॅचाने वाले ये 1500 से ज्यादा परिवार 60.90 वर्गफुट जमीन पर बने कंक्रीट के दड़बे में रहने को विवश हैं। 60.90 के इस प्लाॅट में लगभग आधी जमीन पर दो छोटे छोटे कमरे और एक छोटी सी रसोई बनाई गई है और अपनी आवश्यकतानुसार कोई भी निर्माण कार्य करने की मनाही है। न कोई पानी का कनेक्शन और न बिजली की सुविधा।

दिन भर की वार्ताओं में बस्ती मे रह रहे लोगों का मुख्य आग्रह शहरी समाज से सिर्फ इतना है कि उनके विस्थापन को सिर्फ जमीन या रोज़गार से होने वाला विस्थापन ना समझा जाय क्योंकि इसने उन परिवारों का न केवल परिवेश, संस्कृति और जीवन जीने का तरिका बदला है बल्कि इनके सामने सामाजिक आर्थिक सुरक्षा के साथ साथ अस्तित्व तक कायम रख पाने के खतरे उत्पन्न किये हैं। शान्तिपुर्ण सुरक्षित जीवन पर कम्पनी ने दोहरा प्रहार किया है। एक तरफ, काम करने की जगहों से 20 किलोमीटर दुर इस बस्ती में दिनभर अपराधियों का जमावड़ा रहता है और पुरूषों के काम पर चले जाने के बाद स्त्रियां और बच्चे सभी तरह के शोषण के शिकार होते हैं। दुसरी तरफ, यह विस्थापित बस्ती जिन के जमीन पर बसाई गई है वे इन्हें ही अपना दुश्मन मानते हुए मारने दौड़ते हैं क्योंकि कम्पनी ने यह बस्ती भी पुलिसिया डन्डे के जा़ेर पर बनाई है जमीन के मालिकों को कीमत अदा करके नहीं। पूरी कालोनी में सरकारी मशीनरी की सक्रियता सिवाय देशी शराब के अड्डों के और कहीं नही है, और इन अड्डों पर भी बस इसलिए कि पुलिस को हफता वसुली के लिए यहां तक आना पड़ता है।

पूरी बातचीत के दौरान कम्पनी के द्वारा पाले गये गुण्डों, जो कि हिन्डालको के सुरक्षा अथवा सी0एस0आर0 विभाग भी देखतें हैं, के द्वारा खलल पैदा करने कि तमाम कोशिशें हुईं।

संक्षेप में ही किन्तु प्रतिदिन की रिपोर्ट जारी करने का एकमात्र कारण बस इतना है कि सिंगरौली को उर्जाधानी समझने वाले लोगों से सिंगरौली की आदिवासी किसान कामगार जनता यह आग्रह करती है कि जिनका विनाश करके देश के विकास के खोखले दावे किये जा रहें हैं उनकी जिन्दगी और ज्यादा दयनीय न बनाई जाय।

द्वारा जारी
रवि शेखर
लेकविद्या आश्रम सिंगरौली, मध्य प्रदेश
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DAY FOUR
दिनांक-29.12.12
घर ना छोड़ने पर खाई गोली, रिपोर्ट के बावजुद कोई जाॅच नहीं।
गुन्डागर्दी में रिलायंस को पीछे छोड़ा आदित्य बिरला नें।

प्रस्तुत है लोकसंघर्ष यात्रा के चौथे दिन का संक्षेप।

सिंगरौली के विभिन्न जन संगठनों के सहयोग से और लोकविद्या आश्रम के संयोजकत्व में आदिवासी किसान कामगार एकता के लिए निकली लोकसंघर्ष यात्रा के चैथे दिन बरगवां क्षेत्रा मे लग रहे हिन्डालको के एल्युमिनियम प्लान्ट और कैप्टिव पावर प्लान्ट के उन क्षेत्रों मे पहुची जहां कम्पनी सैकड़ों परिवारों को उजाड़कर जले हुउ कोयले की राख रखने का बांध बना रही है। ओरगड़ी और गिधेर गांव को उजाड़कर ये सारा उपक्रम किया जा रहा है जो मुलतः खेती किसानी करने वाले लोग रहे हैं। जमिन के उर्वरता का आलम यह है कि गांव में किसी को भी अनाज और सब्जियां खरिदने कि जरूरत कभी नही पड़ी। लेकिन अब सभी लोग बाजार पर निर्भर हैं। सब कुछ ख्रिदना है, और आमदनी का जरिया कोई नहीं।

लोगों से बातचीत में आदित्य बिरला समुह द्वारा दुसरी कम्पनीयों की तुलना में जारी क्रुरता की सभी हदें तोड़ देने की अंधी दौड़ के भी कई प्रमाण मिले। केवल मौखिक आश्वासनों से आजि़ज आ चुके भोले भाले किसान जब सभी आश्वासन लिखित तौर पर दिये जाने कि मांग पर अड़ गये तो कम्पनी के अधिकारीयों ने गुन्डों का इस्तमाल किया और लिखित आश्वासन के बजाय गोलियों का सहारा लिया। बृज लाल साकेत पिता राजमन साकेत उन कई उदाहरणो मे एक हैं जिनपर गोलिया चलाई गयीं। उन्होने स्थानिय थाने मे रिपोर्ट भी लिखवाई जिसका कोई फायदा नही निकला। अस्पताल में इलाज हुआ और जान तो बच गई लेकिन छर्रे शरिर में अब तक मौजुद हैं डाक्टर ने छर्रे निकालने से तब तक इन्कार किया है जब तक उसे एफ आई आर की प्रतिलिपि न मिले और थाने ने प्रतिलिपि देने में छः महिने लगा दिये। अब आॅपरेशन में जितने पैसे चाहिये उससे घर का खर्च कई महिनो चल सकता है इसलिए बृज लाल ने छर्रों के साथ ही जिन्दगी कबुल कर ली है।

आज पाॅचवे दिन की यात्रा मझगवां में बनाये गये विस्थापितों की बस्ती से शुरू होनी है समय और व्यवस्थाओं की कमी के कारण दिन भर की वार्ताओं का पुरा विवरण दिया जाना सम्भव नही है। विस्तृत रिपोर्ट यात्रा के पुरे होने पर हम आप तक पहुॅचायेंगे।

द्वारा
लेकविद्या आश्रम
रवि शेखर
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DAY THREE:
दिनांक-28.12.12
‘‘विकास’’ ने लिला पति, सुगिया के द्वारा सुदर्शन की खोज जारी।
तियरा में दिखी बैगा जनजाति के ‘‘संरक्षित’’ घोषित होने की सच्चाई।

प्रस्तुत है लोक संघर्ष यात्रा के तीसरे दिन की वार्ताओं का संक्षेप।

यात्रा के तीसरे दिन का प्रथम पड़ाव हर्रहवा ग्राम पंचायत भवन बना, जहा पहले से लोग यात्रियों का इन्तजा़र कर रहे थे। ग्राम पंचायत स्तर पर सभी लोगों ने विस्तार से बात की और बताया की रिलायंस के इस 3960 मेगावाट बिजली संयंत्र किस कदर गांव और आस पास के जान माल का नुकसान किया है। आज कि बैठक में यह तय किया गया कि पंचायत स्तर पर एक समिति बनाकर गांव के लोग प्रतिरोध करें और यात्रा में शामिल संगठनों के लोग उनका सहयोग करें।

स्थानीय श्री जीतलाल ने बताया कि रिलायंस के अधिकारीगण अक्सर गांव मे आकर हमें जल्द से जल्द गांव छोड़ देने के लिए दबाव बनाते हैं। उन्होंने कहा कि जब उनसे पूनर्वास के बावत् पुछा जाता है तो वे कहते हैं कि जाकर शिवराज सिंह चोहान से बात करो उसके ही कहने से कंपनी यहं आई है। उनकी मनमानियों का उदाहरण देते हुए पंचायत भवन पर एकत्र हुए लोगों ने उत्पीड़न के एैसे एैसे वाकए गिनाए जिससे कि शहरों में सुने जाने वाले विकास के जुमले की हकीकत पता चलती है।

गंाव वालों ने एैसे घर दिखाए जिन्हें बिना किसी पुर्व सुचना के ही रातो रात गिरा दिया गया और घर मे मौजुद लोगों को सारे समान छोड़ कर जान बचाकर भागना पड़ा, वे खेत दिखाए जिनपर लहलहाती फसल को बुलडोजर से कुचलकर सपाट मैदान तैयार किया गया और फिर सड़के बना ली गईं, वे मकान दिखाए जिन्हें गैर रिहायशी बताकर मुआवजा देने से इन्कार कर दिया गया और एैसे लोगों से मिलवाया जिन्हें कम्पनी और जिला प्रशासन की मिलीभगत से कागज पर मृत दिखाते हुए उनकी सम्पत्ती का मुआवजा आपस में बांट लिया गया।

यहा से आगे बढकर यात्रा श्रीमती सुगिया रजक के घर पहुॅची। श्रीमती रजक सुदर्शन रजक की पत्नी हैं और पिछले साढे तीन साल से श्री रजक को ढुंढ रहीं हैं। रजक परिवार ने अपनी जमीन रिलायंस को औने पौने दाम पर देने से इन्कार कर दिया था। रिलायंस के अधिकारीगण वी.वी सिह, संग्राम सिंह, और बैढन थाना के एस आई बी एल तिवारी से इसी सिलसिले में कहासुनी होने के बाद श्री रजक दिनांक 30.05.09 से गायब हैं। श्रीमती रजक और पुरा परिवार आज तक करीबन हर जगह अपनी गुहार लगा चुका है पर उन्हें खोजने की सभी कोशिशें केवल थाने मे रिपोर्ट लिख लेने भर सीमित रह गईं।

यहां से आगे बढकर यात्रा तियरा गंाव मे पहुॅची जहां केन्द्र सरकार द्वारा घोषित, ‘संरक्षित जनजाती‘ बैगा आदिवासी रहते हैं। इन्हें कम्पनी ने अपनी रिहायसी कालोनी बनाने के लिए उजाड़ा है। अपने स्वभाव के अनूसार ही इन बैगा परीवारों ने नोटिस मिलते ही चुपचाप अपनी जगह छोड़ दी और सड़क के दुसरी ओर जहां जैसी जगह मिली वहीं बस गयें। मुआवजे के रूप मे भी जो मिला ले लिया । उनके रहने की जगह देख कर यह बात साफ समझ मे आई की उनके भोलेपन का फायदा उठाते हुए उनके अधिकारों का संगीन हनन किया गया है।

यात्रा मे शामिल लोग की सलाह पर लोकविद्या आश्रम ने यात्रा के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित करने का निर्णय किया है जिससे कि ‘देश हित में होते विकास‘ की कीमत किस कदर चुकाई जा रही है और कौन लोग चुका रहें हैं इसे समझा जा सकेगा।

द्वारा
रवि शेखर
लोकविद्या आश्रम सिंगरौली मध्य प्रदेश
08225935420/599
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DAY TWO:

लोक संघर्ष यात्रा का दूसरा दिन सिद्धि खुर्द और सिद्धि कलां में ख़त्म।
कामरेड संजय नामदेव को एक मामले में जमानत मिली।

दिनांक 27 दिस 2012 को सिंगरौली के तमाम जन संगठनों और लोक विद्या आश्रम द्वारा आयोजित लोक संघर्ष यात्रा सिद्धि खुर्द और सिद्धि कलां गाँव में पहुंची। इन दोनों गावों में कई जगहों पर छोटी छोटी सभाओं का आयोजन किया गया। इन बैठकों में लोकविद्या विचार के अंतर्गत विस्थापन से पैदा होने वाली समस्याओं के बारे में विस्तार से चर्चा की गयी। मुआवजे के जाल में फस कर अपनी ज़मीन देना और फिर खेती किसानी के बजाये कंपनी में मजदूरी करने वाली परिस्थितियों के साजिशन निर्माण के बाबत सभाओं में विस्तार से चर्चा हुई। अपनी जमीन, रोज़गार, बाज़ार, संस्कृति, रिश्तों आदि से विस्थापन का मुआवजा किसी पैकेज में नहीं मिल सकता, इस बारे में चर्चा हुई।

गाँव के लोगों ने रिलायंस द्वारा 3960 मेगावाट बिजली संयंत्र लगाये जाने से से पैदा होती मुसीबतों के बारे में विस्तार से बात की। उन्हों ने कहा कि ज़मीन के औने पौने दाम पर छीने जाने के बाद कोई रोज़गार तो नहीं ही बचा, अब मुआवजे के रूप में मिली थोड़ी सी रकम भी ख़त्म हो चुकी है। सबके सामने भूख से मौत का संकट खडा हो चूका है, और विकल्प के तौर पर उनके सामने बस यही रास्ता है की वे उन्ही ज़मीनों पर कम्पनी के लिए किसी ठेकेदार के मार्फ़त 50 से लेकर 100 रूपए तक की दिहाड़ी पा कर मजदूरी करे और साथ में अपना शारीरिक और मानसिक शोषण कराएँ।

यात्रा में निकले कार्यकर्ताओं ने सबसे यह अपील की कि इन परिस्थितियों का सामना करने के लिए आपस में एकता कायम की जाये, अन्यथा आगे अभी और बड़े संकट पैदा होने हैं।

इस बीच एक बड़े घटनाक्रम में कामरेड संजय नामदेव की विधिक सहायता में लगे साथियों ने यह सूचना दी की उनपर लगाए गये दो मुकदमों में से एक, 427 के मामले, में सम्बंधित कोर्ट ने उनकी जमानत मंजूर कर ली है। साथ ही, दुसरे मामले में जमानत की सुनवाई आज होनी है।

लोकविद्या आश्रम
8225935420/599
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DAY ONE:

साथी,

कामरेड संजय नामदेव की गिरफ्तारी से उत्पन्न परिस्थितियों पर विचार करने और लोकसंघर्ष यात्रा के सन्दर्भ में फैसला लेने के लिए शिवाजी काम्प्लेक्स, विन्ध्यनगर में 11 बजे से बैठक का आयोजन हुआ। इस बैठक में कामरेड संजय से मिलने जिला जेल सिंगरौली गयी टीम भी शामिल हुई। उस टीम के सदस्य राज कुमार ने कामरेड संजय के द्वारा भेजा गया सन्देश पढ़ा जिसमे कामरेड ने यात्रा हर कीमत पर निकालने का आग्रह किया था। अपने सन्देश में उन्होंने कहा था की अगर यात्रा निकालने में देरी हुई, तो क्षेत्र के आदिवासी-किसान कामगार जनता का मनोबल टूटेगा, और प्रशासन के डंडे का भय और ज्यादा व्याप्त हो जायेगा।

कामरेड संजय के सन्देश पढ़े जाने के बाद बैठक में उपस्थित सभी लोगो ने दोपहर 3 बजे से यात्रा शुरू कर दिए जाने का निर्णय लिया। साथ ही, राज कुमार के नेत्रित्व में एक टीम ने कामरेड संजय की रिहाई के सन्दर्भ में जरुरी विधिक कारर्वाही की जिम्मेदारी ली। इस तरह से यह तय किया गया की यात्रा और कामरेड की विधिक सहायता दोनों सुचारू रूप से जारी रहे। किन्तु, यह तय किया गया की क्षेत्र के निवासियों पर प्रशासनिक दमन ना बढ़ जाए, इस हेतु यात्रा में गाँव के अन्दर का रात्रि विश्राम फिलहाल ना किया जाए, और रोजाना रात में लोकविद्या आश्रम लौट आया जाए।

लोक संघर्ष यात्रा की शुरुवात में पहले से तय कार्यक्रमानुसार सासन क्षेत्र में रिलायंस कम्पनी के बिजली संयंत्र से प्रभावित हर्र्वाह और सासन गाँव का भ्रमण किया गया, और बैठकें आयोजित की गयीं। मुलाकातों में स्थानीय जनता द्वारा अपनी तमाम समस्याओं की चर्चा की गयी, और यात्रा में शामिल लोगों ने उन तमाम बातों पर विस्तार से चर्चा की जिसके आधार पर एकता कायम की जा सकती है। अधिकाँश लोगों पर कम्पनी की दलाली करते हुए स्थानीय प्रशासन के द्वारा उत्पीडन की जो कार्यवाही की गयी थी उसका पूरा ब्यौरा हमारे साथी मंजू और गंगा प्रसाद ने नोट भी किया और उनकी विडिओ क्लिप भी बनायी है। आप सब के साथ यह सारे दस्तावेज यात्रा के पूरे होने के बाद हम साझा करेंगे। लोगों और थोड़ी संसाधनों की कमी के कारण यात्रा के सन्दर्भ में रोजाना होने वाली ब्रीफिंग में सभी दस्तावेज का सार्वजनीकरण हमारे लिए संभव नहीं है। आज की यात्रा के एक पड़ाव पर होते जन संपर्क की एक तस्वीर यहाँ संलग्न की जा रही है।

ज्ञात हो की लोकसंघर्ष यात्रा में बाधा पहुंचाने की नियत से हमारे साथी संजय नामदेव को 25.12. 2012 को उनके क्षेत्र बरगवां से तब गिरफ्तार कर लिया गया है, जब वे यात्रा की तैयारी में जन संपर्क में निकले हुए थे।

द्वारा जारी:

लोकविद्या आश्रम,
सिंगरौली, मध्य प्रदेश
08225935420/599
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EVE OF THE YATRA:

साथी,

इस मेल के मार्फ़त हम आपका ध्यान सिंगरौली में चल रहे जन संगठनो और निष्ठावान कार्यकर्ताओं का निजी कंपनियों के इशारों पर प्रशासनिक दमन की तरफ खीचना चाहते हैं। लोकविद्या जन आन्दोलन के संयोजकत्व में पिछले दिनों सिंगरौली जिले की साईकल यात्रा का निर्णय लिया गया था, जो की कल दिनांक 26 दिसंबर से शुरू होने वाली थी। आज, जबकि प्रशासन इस यात्रा को रोकने की सारी तरकीबें लगा कर हार चूका था, हमारे महत्वपूर्ण साथी और ट्रेड युनियन नेता कामरेड संजय नामदेव को धारा 354 और 427 के अंतर्गत फर्जी मुक़दमे में फसा कर सुबह पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

पिछले कई दिनों से इस यात्रा को रद्द कर देने का आग्रह करते हुए हमें सी आई डी के एक व्यक्ति का फ़ोन आ रहा था जो की पूछने पर अपना नाम “पांडे” बताता है। हमारे द्वारा अपने निर्णय पर टिके रहने के कारण आज कामरेड संजय की गिरफ्तारी की गयी है। मुक़दमे के फर्जी होने के पूरे प्रमाण हमारे पास मौजूद हैं। जिस महिला की शिकायत पर 354 का मुकदमा कायम किया है, उसने शपथ पत्र दाखिल करते हुए यह कहा है की वह कामरेड संजय को नहीं और उससे संजय के खिलाफ बयान पुलिस ने दबाव बना कर लिया है।

यात्रा की तैयारी में लगे सभी संगठनो ने आज शाम शिवाजी काम्प्लेक्स, नवजीवन विहार में बैठक कर यह निर्णय लिया है की यात्रा के पहले कामरेड संजय की रिहाई के लिए अभियान चलाया जाये, यात्रा को उनकी रिहाई के बाद उनके साथ ही शुरू किया जाए।

ज्ञात हो की कामरेड संजय नामदेव को कंपनियों की मनमानी की खिलाफत करने और आन्दोलनात्मक गतिविधियों के कारण पिछले दिनों रा सु का में गिरफ्तार किया गया था, किन्तु 52 दिनों बाद पुलिस को, जन दबाव को देखते हुए, इन्हें रिहा किया गया था।

आपसे आग्रह है की सिंगरौली की वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपने स्तर पर इन मुद्दों को उठाने का और दुनिया का ध्यान आक्रिस्ट कराने की कोशिश करें। सिंगरौली की आदिवासी-किसान जनता अपनी लड़ाई लड़ने में समर्थ है, बशर्ते हम सब अपनी क्षमतानुसार जिम्मेदारियों का निर्वहन करें।

आपके पढने हेतु हम वह परचा संलग्न कर रहे हैं, जो यात्रा के लिए छपवाया गया था।

रवि शेखर, एकता,
लोकविद्या आश्रम, सिंगरौली,
मध्य प्रदेश।
08225935420/599
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