Delhi – Discussion on dams and future strategy in the Ganga Valley of Uttarakhand, Nov 8

We would like to meet you all, share our experience and discuss about the future strategy of our work in the Ganga and Yamuna Valley of Uttarakhand.

Date: 8th November, 2013
Time: 4.30 pm – 6.30 pm
Venue: Room No. 308, Indian Social Institute, 10, Institutional Area, Behind Sai Baba Mandir, Lodhi Road, New Delhi

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An invitation to listen to apathy in Ganga Valley
8th November, 2013, Room NO. 308, ISI, Lodhi Road, New Delhi

Dear Friends,

Zindabad!
We all know about the recent floods in Uttarakhand and the truth behind this. This quantum of natural calamity increased many fold due to existing and dams under-construction on Bhagirathi-Alaknanda and their tributaries. Vishnupryag and Srinagar Hydro Electricity Projects (HEP) are some of the examples in Alaknanda Valley and Assiganga HEPs, Maneri-Bhali phase -2 is another bad example in Bhagirathi Valley, to quote a few.

The situation of these dam affected areas are worst as follows:-

On one side dam companies are busy in doing dam repairing work without any study or survey of the incident.
No inquiry has been set up by the state or central agency.
No FIR were allowed to be filed in Police stations.

We would like to meet you all, share our experience and discuss about the future strategy of our work in the Ganga and Yamuna Valley of Uttarakhand.
Date: 8th November, 2013
Time: 4.30 pm – 6.30 pm
Venue: Room No. 308, Indian Social Institute, 10, Institutional Area, Behind Sai Baba Mandir, Lodhi Road, New Delhi
Looking forward to meet you all.

Dinesh Panwar, Ranu Chowhan, P. V. Kala, Vimalbhai

Contact: Seela 09718479517 Vimalbhai 9718479517

Matu Jansangthan
Village Chham, Pathri Part-4 Haridwar, Uttarakhand
For Correspondence only:-D-334/10, Ganesh Nagar, Pandav Nagar Complex, Delhi-92 +919718479517

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निमंत्रण: उत्तराखंड बाड़ की असलियत
दिनः 8 नवंबर, 2013 समयः 4.30 से 6.30 बजे तक
स्थानः कमरा न0- 308, आई एस आई, 10 इंस्टीट्यूशनल एरिया, संाई बाबा मंदिर के पीछे, लोधी रोड, नई दिल्ली.

प्रिय साथी,
जिंदाबाद,
जून, 2013 में उत्तराखंड बाढ़ के बारे में आप सभी जानते है। यह प्रचारित किया गया कि यह बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा थी जबकि यह पूर्ण सत्य नही है। प्राकृतिक आपदा का परिमाण कार्यरत और निर्माणाधीन बांधों के कारण बहुत बड़ा है। विष्णुप्रयाग और श्रीनगर बांध जैसे उदाहरण अलकनंदा घाटी और अस्सीगगंा बांध परियोजनायंे व मनेरी भाली चरण-2 दूसरे अन्य बुरे उदाहरण भागीरथीघाटी में हमारे सामने है।
इन सभी बांध परियोजनाओं के क्षेत्रो में स्थिति खराब है जैसेः-
दुर्घटनाओं की बिना किसी जांच पड़ताल किये बांध कंपनियंा बांधों की मरम्मत में लगी है।
राज्य व केन्द्र की सरकारों ने कोई जांच नही शुरु की है।
थानों में इन बांध कंपनियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया रिर्पोट भी दाखिल नही करने दी जा रही है।
इन क्षेत्रों से बांध प्रभावित ग्रामवासी दिल्ली में है। यहंा हम आप सबसे अपने अनुभव बाटंना चाहते है और गंगा घाटी की आज की सच्चाई सामने रखना चाहते है। साथ ही आगे की रणनीति में सहयोग भी चाहेगे। इसके लिये एक बैठक रखी गई है।

हमंे अपेक्षा रहेगी की बैठक में आप स्वंय आयेंगे और अपने सहमना साथियों को भी साथ लायेंगे।
दिनः 8 नवंबर, 2013
समयः 4.30 से 6.30 बजे तक
स्थानः कमरा न0- 308, आई एस आई, 10 इंस्टीट्यूशनल एरिया, संाई बाबा मंदिर के पीछे, लोधी रोड, नई दिल्ली.
आपसे मिलने की अपेक्षा में

दिनेश पंवार, रेनू चौहान, पी. वी. काला, विमलभाई
दिल्ली संपर्क:- सीला 9212587159 विमलभाई 9718479517